बीता साल 2023 जैन समाज के लिए एक चुनौतीपूर्ण वर्ष रहा, जिसमें तीर्थ क्षेत्रों पर अतिक्रमण और मुनियों पर हमले जैसी घटनाएं समाज की झकझोर गईं। इसलिए नए साल 2024 का आगमन एक नए संकल्प के साथ होना चाहिए, जिससे समाज सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाए। पढ़िए राखी जैन की विशेष रिपोर्ट ।
जयपुर। बीते साल के अनुभव नए साल के संकल्पों को मजबूत करते हैं और कुछ नया करने का सबक भी। बात जैन धर्म और उसके अनुयायियों की करें तो साल 2023 ने समाज को बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर दिया, कई ऐसी घटनाएं हुईं की शांत चित्त का समाज उद्वेलित हो गया। चाहे वो पावन सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने की बात हो या जैन मुनि कामकुमार नंदी महाराज का अपहरण कर कथित हत्या किए जाने का मामला। ऐसी घटनाएं दोबारा ना हो इसके लिए जैन समाज को जागरूक और एकजुट होने की जरुरत है । जैन समाज, जिसे अपने अनुपम धारोहर, नैतिकता, और तात्कालिक समस्याओं के प्रति अपनी सजगता के लिए जाना जाता है, उसे जागरूकता की आवश्यकता है। जैन समाज को उत्कृष्टता और सद्गुणों की दिशा में अग्रणी बनाए रखने के लिए हमें समाज को जागरूक करने के लिए सकारात्मक योजनाएं बनानी चाहिए। सबसे पहले उन घटनाओं पर नजर जिनसे जैन समाज को सबक लेना है ।
जैन तीर्थ सम्मेद शिखर अब नहीं बनेगा पर्यटन स्थल: देश भर में प्रदर्शन के बाद फै़सला वापस
सम्मेद शिखर के मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फै़सला लिया और झारखंड के पारसनाथ स्थित जैन तीर्थ स्थल सम्मेद शिखर पर पर्यटन और इको टूरिज्म एक्टिविटी पर रोक लगा दी गई.केंद्र सरकार ने तीन साल पहले जारी अपना आदेश वापस ले लिया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी नोटिफिकेशन में सभी पर्यटन और इको टूरिज्म एक्टिविटी पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए।दरअसल झारखंड सरकार श्री सम्मेद शिखर जी यानि पार्श्वनाथ (पारसनाथ) पर्वत को धार्मिक पर्यटन क्षेत्र घोषित करने पर विचार कर रही थी। इसके पीछे उसका मकसद ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना था। सीएम हेमंत सोरेन के निर्देश पर पारसनाथ के अलावा देवघर, रजरप्पा, इटखोरी समेत कुछ और जगहों के लिए नीति तैयार करने पर विचार किया जा रहा था. जैन समाज का कहना था कि अगर ऐसा होता तो पारसनाथ में होटल और पार्क बनते। लोग दर्शन के साथ छुट्टियां और पिकनिक मनाने भी आते। इससे पवित्र पर्वत पर मांस-मदिरा आदि के सेवन की भी खुली छूट हो जाती. ये युवाओं को मौज मस्ती का अड्डा बन जाता। जैन धर्म में इसकी इजाजत नहीं है।
महेश गिरी के खिलाफ उतरा जैन समाज:गिरनार जी प्रकरण को लेकर समाज हुआ आहत
पूर्वी दिल्ली के पूर्व सांसद और जूनागढ़ के पीठाध्यक्ष महेश गिरी ने 28 अक्टूबर को सनातन धर्म के नाम से साधुओं का सम्मेलन किया था. इस दौरान जूनागढ़ के पीठाध्यक्ष और पूर्व बीजेपी सांसद ने गिरनार पर्वत पर दत्तात्रेय समाज का अधिकार बताते हुए जैन समाज के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया. उन्होंने जैन समाज, मुनियों और श्रद्धालुओं से पोछा लगवाने, सफाई करवाने की बात कही. न्याय शासनम कानूनी संस्था ने बताया कि महेशगिरी के सहयोगी जैन श्रद्धालुओं के साथ पहले भी मारपीट, धमकी और उन पर जानलेवा हमला कर चुके हैं. इस बयान के बाद पूरा जैन समाज लामबंद हो गया था गुजरात के जूनागढ़ के जैन तीर्थ गिरनार पर मठ बनाकर आधिपत्य स्थापित करने वाले महेश गिरी ने बाद में उसका खंडन करते हुए कहा की ये गुजराती भाषा में अपने नागा बाबाओं के लिए कहा था ना की दिगंबर जैन साधुओं के लिए। इस एक घंटे की वीडियो में महेश गिरी ने अनेक जैन संतो जिनमें मुनि प्रमाण सागर, मुनि सुधा सागर, मुनि पुल्का सागर, आचार्य गुणधर नंदी जैसे बड़े साधुओं के नाम है। जैन समाज इस कृत्य से बहुत आहत हुआ पूरे देश के जैन समाज ने अपने अपने शहर में विरोध भी दर्ज करवाया।
गोम्मट गिरी का विवाद : जैन तीर्थ स्थलों को हड़पने की साजिश
मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के निकट स्थित जैन समाज के गोम्मटगिरी तीर्थ का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जैन संत पुलक सागर जी महाराज ने इंदौर जिले की पहाड़ी पर स्थित गोम्मट गिरी तार्थ के विवाद का निराकरण न होने पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। एक वीडियो जारी कर पुलक सागर जी महाराज ने आरोप लगाया है कि सोची समझी साजिश के तहत जैन तीर्थों को लूटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सम्मेद शिखर, गिरनार और पालीताणा और अब गोम्मट गिरी जैसी जगहों पर जैन तीर्थ स्थलों को हड़पने की साजिश की जा रही है।
ये है गोम्मट गिरी का विवाद
दिगम्बर जैन समाज के प्रमुख तीर्थ गोम्मट गिरी की सुरक्षा को लेकर गोम्मट गिरी ट्रस्ट वहां बाउंड्री वॉल बनाना चाहता है। इसकी अनुमति हााईकोर्ट ने भी दी है। इस माह की शुरुआत में पुलिस सुरक्षा के बीच बाउंड्री वॉल बनाने का काम शुरू भी हुआ लेकिन बाद में पुलिस सुरक्षा हटा ली गई। पुलिस वालों के जाते ही कुछ लोगों ने इस जमीन से रास्ता निकालने के लिए चूने की लाइन खींच दी । इसे लेकर इंदौर जैन समाज खासा नाराज हो गया। जैन समाज की लंबे समय से मांग है कि यहां बाउंड्री वॉल बना दी जाए और अवैध कब्जों को तत्काल हटाया जाए।
कर्नाटक में जैन मुनि की हत्या : सकल जैन समाज में रोष की लहर
जैन धर्म अहिंसा परमो धर्म का उद्घोषक कहा जाता है, प्राणी मात्र को मारना भी हिंसा मानता है ऐसे में दिगंबर संत काम कुमार नंदी महाराज की नृंशस हत्या कड़ा प्रश्न खड़ा करता है। बीते साल 2023 में कर्नाटक के चिकोडी के हीरेकुडी गांव में जैन मुनि कामकुमार नंदी महाराज का अपहरण कर कथित हत्या किए जाने का मामला सामने आया। वह बीते 5 जुलाई से लापता थे। शिकायत मिलने पर पुलिस ने संदिग्धों पूछताछ की, जिसके बाद मामले का खुलासा हो सका। कर्नाटक से मिली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिगम्बर जैन संत आचार्य काम कुमार नंदी महाराज बीते लगभग 15 वर्षों से चिकोड़ी जिले में नंद पर्वत पर प्रवास कर रहे थे। वह गणधराचार्य कुंथूनाथ महारज के शिष्य थे। 5 जुलाई 2023 के दिन कुछ लोगों ने उनका अपहरण कर लिया था। जैन संत के लिए अपहरणकर्ता किसी अज्ञात स्थान पर ले गए और हत्या कर दी। शनिवार सुबह उनकी कथित हत्या की सूचना पुलिस के जरिए लगी है। जैन संत के अपहरण के बाद हत्या किए जाने के मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 2 आरोपियों के लिए गिरफ्तार कर लिया है।
साल 2024 और जैन समाज के संकल्प
नए साल में जैन समाज का सबसे महत्वपूर्ण संकल्प सामाजिक समर्पण का होना चाहिए। हमें समझना होगा कि समाज का सर्वोत्तम हित केवल एकदृष्टि में ही नहीं, बल्कि सामाजिक समर्पण के माध्यम से ही संभव है। सामाजिक समर्पण के माध्यम से ही हम एक एकमात्र में एकता और समरसता की दिशा में अग्रणी बन सकते हैं। साहित्यिक साधना नए साल का दूसरा महत्वपूर्ण संकल्प होना चाहिए। जैन साहित्य को समझने और प्रसारित करने के लिए अधिक प्रयासों की आवश्यकता है। इससे समाज में जैन धरोहर और सिद्धांतों की महत्वपूर्ण जानकारी होगी जो समृद्धि और समाज के उत्थान में सहायक हो सकती हैं। तीर्थ क्षेत्रों पर अतिक्रमण के मामलों के खिलाफ एकजुटता बहुत जरुरी है । समाज को यह समझना होगा कि तीर्थ क्षेत्रों का सम्मान करना एक आदर्श जैन नागरिक की पहचान का हिस्सा है और इसे सख्ती से बचाना चाहिए। मुनियों का सम्मान और समर्थन करना समाज की शिक्षा और साधना की परंपरा को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन संकल्पों को पूरा करने के लिए सामाजिक संगठन की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। समाज को एकजुट होकर सामाजिक सुधारों की दिशा में काम करना होगा। सामाजिक न्याय, शिक्षा, और साहित्य के क्षेत्र में कदम से कदम मिलाकर समृद्धि की ओर बढ़ना होगा।













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