अतिशय तीर्थ क्षेत्र बीना जी वारहा बुंदेलखंड में जैन संस्कृति की गौरवपूर्ण धरोहर है। यह प्राचीन अतिशय क्षेत्र है जो सुखचैन नदी के सभी ओर अपनी आलौकिक छटा बिखेरता हुआ प्रकृति की सुरम्य वातावरण में स्थित है। पढ़िए राजीव सिंघई का यह विशेष आलेख…
बुंदेलखंड। अतिशय तीर्थ क्षेत्र बीना जी वारहा बुंदेलखंड में जैन संस्कृति की गौरवपूर्ण धरोहर है। यह प्राचीन अतिशय क्षेत्र है जो सुखचैन नदी के सभी ओर अपनी आलौकिक छटा बिखेरता हुआ प्रकृति की सुरम्य वातावरण में स्थित है। आचार्य भगवन श्री विद्यासागर महाराज के दिशा-निर्देशन में इस तीर्थ को भव्य स्वरूप दिया गया है। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बीना जी वाराहा मध्य प्रदेश की सागर जिले के तहसील मुख्यालय देवरी से 8 किलोमीटर दूर स्थित है।
बीना वारहा क्षेत्र पर सुनो नदी सुखचैन। बहती-बहती कह रही इत आ सुख दिल- रैन।।
क्षेत्र का अतिशय
इस संबंध में यह अनुश्रुति है कि एक धर्मात्मा जैन गांव-गांव जाकर व्यापार करते हुए अपनी आजीविका चलाता था। इसे हेतु वह बीना ग्राम में भी आता था। रास्ते में एक स्थान पर उसे प्रायः ठोकर लगती थी। एक रात उसे सपना आया कि जहां तुम्हें ठोकर लगती है, वहां खोजने से श्री शांतिनाथ भगवान की मूर्ति के दर्शन होंगे। उसने 2 दिन खुदाई की और तीसरे दिन पुनः स्वप्न आया कि तुम जहां मूर्ति स्थापित करना चाहते हो, वहीं ले जाकर रुकना और इस बीच पीछे मुड़कर नहीं देखना अन्यथा भगवान वहीं रुक जाएंगे। यह श्रावक तीसरे दिन आया और खोदने पर उसे शांतिनाथ भगवान की मूर्ति के दर्शन हुए। दर्शन पाकर भक्ति में भावभिवोर हो गया और प्रभु चरणों में लीन हो गया। भगवान को छोटी गाड़ी में बैठाकर आगे बढ़ा तो उसे जय-जयकार के एवं संगीत का नाद सुनाई दे रहा था। उससे ना रहा गया और उसने कौतुहलवश पीछे मुड़ कर देख लिया तो गाड़ी वहीं रुक गई। यह वही स्थान है जहां भगवान शांतिनाथ विराजमान हैं।
भव्य मंदिर का निर्माण
बीना वारहा जी में शांतिनाथ भगवान के चमत्कार की गाथा गाते हैं। क्षेत्र प्राचीन अधिकारी मनोज्ञ दर्शनी है। क्षेत्र पर दयोदय गौशाला भी स्थापित है। आचार्य भगवन की प्रेरणा से यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया जो बहुत ही खूबसूरत और भव्य है। यहां आचार्य श्री की प्रेरणा से हथकरघा केंद्र भी स्थापित किया गया है। इस समय आचार्य भगवन के परम प्रभावक शिष्य निर्यापक संत मुनिराज समय सागर महाराज ससंघ यहां विराजमान हैं।













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