यंग जैन स्टडी ग्रुप के पं. प्रकाश छाबड़ा द्वारा आयोजित 8वें बाल संस्कार शिविर का समापन सन्मति जैन स्कूल में हुआ। सात लेवल में विभाजित 50 कक्षाओं में डिजिटल सामग्री के माध्यम से जैन दर्शन के अनुयोगों का अध्ययन अनेक विद्वानों ने कक्षाओं में कराया। पढ़िए राजेन्द्र जैन ‘महावीर’ की रिपोर्ट…
इंदौर। यंग जैन स्टडी ग्रुप के पं. प्रकाश छाबड़ा द्वारा आयोजित 8वें बाल संस्कार शिविर का समापन सन्मति जैन स्कूल में हुआ। सुव्यवस्थित, समयबद्धता के साथ आधुनिक तकनीक के उपयोग से संचालित इस शिविर में एक मई से 8 मई तक 2100 बच्चों ने प्रातः पूजन कर अष्ट द्रव्यों को चढ़ाया, वहीं उनका अर्थ भी समझा। सात लेवल में विभाजित 50 कक्षाओं में डिजिटल सामग्री के माध्यम से जैन दर्शन के अनुयोगों का अध्ययन अनेक विद्वानों ने कक्षाओं में कराया।
पं. प्रकाश छाबड़ा, जो कि अमेरिकी कम्पनी माइक्रोसाफ्ट वर्ल्ड में साफ्टवेयर इंजीनियर रहे हैं, ने बताया कि संस्कार शिविर में आने वाले बच्चे न केवल जैनत्व सीखते हैं बल्कि वे अपने जीवन में अहिंसा-दया, करुणा, क्षमा के साथ विनयशीलता और जीवन जीने की कला भी सीखते हैं। आधुनिक संसाधनों के प्रयोग से जीवन में आ रहे परिवर्तन को सकारात्मक ढंग से उपयोग करने की कला भी शिविर में सिखाई गई है। प्रत्येक कार्य करने का नहीं का कारण बच्चों को तथ्यों के साथ बताने से बच्चे उसे स्वीकार कर जीवन में लागू करते हैं।

इनका रहा सहयोग
आठ दिवसीय शिविर में पं. रतनलालजी शास्त्रि, सांसद शंकर लालवानी, पंकज संघवी, अतिरिक्त कलेक्टर सपना जैन, डिप्टी कमिशनर अनुराग जैन, सोनाली जैन, जिला कमान्डेंट सुमत जैन, अतिरिक्त कमिश्नर वीरेन्द्र जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता वीर कुमार जैन सेल टेक्स आफिसर आलोक जैन, वरिष्ठ समाजसेवी किरण जैन, अर्पित, मोहिनी जैन, सुनील जैन (अरिहंत केपिटल), अमित कासलीवाल, राजकुमार पाटोदी, राकेश विनायका, विपुल झल, दिलीप डोसी, प्रदीप बड़जात्या, राहुल पटेल, अभीजीत जैन, सुनील शाह, दिलीप गोवा, मनोज गोधा, नेम लुहाड़िया, संजय जैन बड़नगर, अशोक बड़जाता, कैलाश वेद, एम.के.जैन, अविनाश सेठी, विजित-नव्य रामावत, प्रभा मनीष गोधा, नवीन- शिवानी गोवा, आनंद अनिता गोधा, राजेश लारेल, ज्ञानेश जैन, सुनील जैन, राजेश जैन, महेश अग्निहोत्री, राजकुमार शाह, प्रीतेश जैन, निलेश पाटोदी, रीतेश, आशीष डोसी, राजकुमार जैन, राजेश वेद, राजकुमार बड़जात्या मुकेश व सौरभ जैन, सुनील वल, अजय मिटा जैन, अखिलेश जैन, निलेश पाटोदी, जयश्री टोंग्या आदि वरिष्ठजनों ने शिविर का अवलोकन कर प्रसन्नता व्यक्त की। अनेक कार्यकर्ताओं ने मिलकर आयोजन को सफल बनाया। प. प्रकाश छाबड़ा ने बताया कि जैनत्व के संस्कार भारतीय संस्कृति को सुदृढ़ बनाते हैं। एक संस्कारी बालक देश का जिम्मेदार नागरिक बनता है, इसलिए ऐसे शिविर अत्यन्त आवश्यक है, जो प्रतिवर्ष आयोजित किए जाएं। शिविर में सम्मिलित छात्र शिविरार्थियों के पंजीयन से लेकर उनके आने-जाने आदि समस्त कार्यों का रिकार्ड डिजिटल रूप से रखा जाता है। उल्लेखनीय है कि अभी तक दस हजार से अधिक विद्यार्थी जैनत्व सीख चुके हैं व जैन जीवन पद्धति का प्रयोग अपनी जीवन शैली में कर रहे हैं।













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