मुनि पुंगव 108 सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में जैन धर्म के प्रवर्तक एवं प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान की जन्म जयंती तीर्थंकर जन्म कल्याणक के रूप में 16 मार्च को मनाई जाएगी। इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम होंगे। पढ़िए राजीव सिंघई की विशेष रिपोर्ट…
टीकमगढ़। शहर में निर्यापक मुनि पुंगव 108 सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में जैन धर्म के प्रवर्तक एवं प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान की जन्म जयंती तीर्थंकर जन्म कल्याणक के रूप में 16 मार्च को मनाई जाएगी। गुरुवार को प्रातः 6:00 युवा मंडल द्वारा पारसनाथ धाम से आदिनाथ धाम तक बाइक रैली निकाली जाएगी। प्रातः 6:30 मुनि श्री का पारसनाथ धाम से नंदीश्वर कॉलोनी स्थित आदिनाथ धाम में आगमन होगा। प्रातः 7:00 बजे से मुनि श्री के सानिध्य में आदिनाथ धाम में विराजमान आदिनाथ भगवान का हजारों लोगों के द्वारा महामस्तकाभिषेक होगा। इसके पश्चात आदिनाथ भगवान के जन्म के उपलक्ष्य में अस्पताल में जैन समाज के लोगों द्वारा फल वितरित किए जाएंगे। इसके बाद 10:30 गांधी चौराहे पर भगवान के जन्म कल्याणक की खुशी में मिष्ठान वितरण भी किया जाएगा।
निकाली जाएगी शोभायात्रा
दोपहर 12:45 बजे पारसनाथ धाम जैन मंदिर से विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। जिसमें शहर के सभी मंदिरों के श्रीजी पालकी में विराजमान होकर चलेंगे। टीकमगढ़ शहर के सभी महिला मंडल, शहर के सभी नवयुवक मंडल अपनी प्रस्तुति देते हुए चलेंगे। जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ राजेंद्र पार्क पहुंचेगा, जहां श्रीजी का अभिषेक एवं मुनि श्री के प्रवचन होंगे।

प्रतिकूल परिस्थितियों से डरें नहीं
बुधवार को प्रातः 8:15 बजे से मुनि श्री के मंगल प्रवचन शुरू हुए। मुनि श्री ने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों में हमें डरना नहीं है। हमें हर चुनौती का सामना करना है, उनका डटकर मुकाबला करना है। भगवान श्री राम के वनवास के बारे में बताया कि जैसे ही रामचंद्र जी को पता चलता है कि उन्हें राजगद्दी नहीं, 14 वर्ष का वनवास मिला है, उनके चेहरे पर वही तेज और मुस्कान थी। मंत्री ने कहा कि यहीं रामचंद्र जी की पहचान थी। मुनि श्री ने बताया कि पूरी अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया-संवारा गया था। घर-घर में दीपक जलाए जा रहे थे कि श्रीराम का कल राज्याभिषेक होने जा रहा है। उसी समय उनका पुण्य कमजोर होता है और पाप कर्म का उदय आता है। सुबह राजा दशरथ ने रामचंद जी को आदेश दिया कि तुमको 14 वर्ष का वनवास दिया जाता है। वन जाने से पहले रामचंद्र जी माता कैकई के पास जाकर आशीर्वाद लेते हुए कहते हैं कि मां मुझे आशीर्वाद दो। मैं तुम्हारी भावनाओं पर खरा उतरूं। रामचंद्र जी ने माता कौशल्या से पहले कैकई के पैर छुए और उनके मन में कोई विद्रोह नहीं था। उनका मन प्रसन्नचित था। मुनिश्री ने कहा कि यह धर्म ऐसा नहीं, जो बाजार से खरीदा जा सके, धर्म एक शुद्ध आत्मा की पर्याय है। समस्त प्रतिकूल परिस्थिति में प्रतिकूलता जानने वाले के प्रति तुम्हारे क्या भाव हैं। वह त्याग तपस्या और साधना तुम्हें भगवान बनाती है। ऐसे ही नहीं दुनिया श्री राम का नाम लेती है। रामचंद्र जी हमेशा मर्यादा में रहे, कभी अमर्यादित नहीं हुए। इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम से दुनिया जानती है।
मनाया जाएगा तीर्थंकर कल्याणक
मुनि श्री ने कहा कि गुरुवार को जैन धर्म के प्रवर्तक एवं प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म कल्याणक तीर्थंकर कल्याणक के रूप में मनाया जाएगा ।आदिनाथ भगवान का जन्म आज से करोड़ों वर्ष पहले चेत्र कृष्ण नवमी के दिन सूर्योदय के समय हुआ था। उनके पिता का नाम राजा नाभिराय एवं माता का नाम मरूदेवी था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अयोध्या नगर में हुआ था। इनको ऋषभदेव तथा वृषभदेव के नाम से भी जाना जाता है। जैन धर्म की पवित्र पुस्तक आदि पुराण में इनका विस्तृत रूप से उल्लेख मिलता है।













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