सम्मेदशिखर

ये तीर्थ स्थल इसे मसूरी, नैनीताल न बनाएं- आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर

 

सम्मेद शिखर पर जैन समाज की बातों को जानने आचार्य श्री से मिला प्रतिनिधिमंडल

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राजकुमार अजमेरा, कोडरमा – शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर पर्वत के संरक्षण, संवर्धन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए दिल्ली से आये केंद्रीय दल और झारखंड सरकार के प्रतनिधि व वैज्ञानिकों ने सम्मेद शिखर के सिलसिले में आचार्य श्री अंतर्मना प्रसन्न सागर जी से भेंट की । इस प्रतिनिधिमंडल से पहाड़ का निरीक्षण किया और विभिन्न बिंदूओं पर अंतर्मना गुरुवर से मार्गदर्शन लिया है ।

सम्मेद शिखर बचाने की मुहिम का असर, अधिकारी पहुंचे

आचार्य श्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में केन्द्रीय दल के वरिष्ठ सदस्य श्री संजय के. श्रीवास्तव IFS – Former PCCE तमिलनाडु, वैज्ञानिक फॉरेस्ट विषय पंचकुला के डॉक्टर विभु प्रकाश जी, डिपार्टमेंट ऑफ़ फॉरेस्ट नैनीताल के डॉक्टर एम. जितराम प्रोफेसर,वैज्ञानिक वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ़ इण्डिया के डॉ.अमित कुमार जी, मधुबन के रेंजर श्री रामबाबू सिंह व स्थानीय फॉरेस्ट अधिकारी शामिल रहे ।

अधिकारियों ने किया निरीक्षण, गुरुवर ने दिया मार्गदर्शन

अधिकारियों ने पहाड़ का निरीक्षण किया और अंतर्मना गुरुदेव से भेंट कर आशीर्वाद व विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए मार्गदर्शन लिया । अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज गुरुदेव 557 दिन की अखण्ड मौन व्रत की एकांतवास साधना में स्वर्णभद्र कूट पर रत है, इसलिए अन्तर्मना गुरदेव ने केन्द्र सरकार से आये सभी सदस्यों को तीर्थ राज सम्मेद शिखर पर्वत के संरक्षण, सम्वर्धन, सादगी, स्वच्छता, और पर्वत की पवित्रता के लिए विशेष रूप से यह निर्देशित किया कि यह पहाड़़ सम्पूर्ण जैन समाज की धड़कन है, श्रद्धा विश्वास और आस्था का केंद्र है।

यदि इसकी पवित्रता के साथ, सरकार खिलवाड़ करती है तो इससे जैन समाज को बहुत चोट पहुंचती है। अतः इसके मूलभूत सुविधाएं अस्तित्व के साथ कोई भी परिवर्तन नहीं होना चाहिए ।

केदारनाथ,बद्रीनाथ की तरह सम्मेद शिखर भी तीर्थराज

आचार्य श्री ने कहा कि इस तीर्थराज पर्वत को पर्यटन नहीं, तीर्थ की पवित्रता पर ध्यान देने की आवश्यकता है । जैसे केदारनाथ, बद्रीनाथ, वैष्णो देवी, काशी, अयोध्या तीर्थ है उसी प्रकार शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर पर्वत भी पवित्र धर्म तीर्थराज है । आपकी सुविधा देने पर हमारे तीर्थराज सम्मेद शिखर की पवित्रता पर आशंका असम्भावी है ।

सभी सदस्यों ने गुरुदेव के कठिन तप साधना की अनुमोदना की और कहा कि आप जैसे तपस्वी साधु सन्तों से ही यह सब सम्भव होगा । सभी ने गुरुदेव को यह विश्वास दिलाया कि हमसे पहाड़ के संरक्षण, सुरक्षा के लिए जो भी अच्छे से अच्छा होगा हम अवश्य करेंगे। और आपके मार्गदर्शन अनुसार सभी बिन्दुओं पर विचार विमर्श किया जायेगा ।

पहाड़ की सुरक्षा,संरक्षण के लिए हरसंभव मदद
आचार्य प्रसन्न सागर जी ने तीर्थ स्थल और पर्यटक स्थल में अंतर को समझाते हुए अधिकारियों से कहा कि ” यह एक पवित्र धर्म स्थल है । इसे नैनीताल, शिमला, मसूरी, ऊंटी ना बनने दें । अन्यथा जैन समाज आपको कभी माफ नहीं कर पाएगा । यह घूमने फिरने का नहीं बल्कि मन के मैल को धोने का पवित्र पुण्य स्थान है.!”

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Shreephal Jain News

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