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जैन समुदाय की आबादी एक फीसद, आयकर में योगदान 24 फीसदी

 

जयपुर। जैन समाज की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का देश की जीडीपी और विकास में बड़ा योगदान है। आयकर प्रदाता भी इस समुदाय के लोग सर्वाधिक हैं। जैन समुदाय के लोग बाकी भारतीयों की तुलना में अधिक पैसा कमाते हैं, परंपरागत रूप से वे कृषि में नहीं रहे हैं। जहां भी ये बिजनेस स्थापित करते हैं, वहां की इकॉनामी फलने-फूलने लगती है। उनके उद्यमों से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है।
एक आंकड़ें के अनुसार देश की कुल जनसंख्या का एक प्रतिशत ही जैन समाज का आबादी है। लेकिन कुल इनकम टैक्स का 24 फीसद जैन समाज के लोग भरते हैं। देश के कुल शेयर ब्रोकरों में 46 फीसद जैन हैं। कुल विकास में 25 फीसद योगदान जैन समाज का है। दान -दक्षिणा का 62 फीसद जैन समाज द्वारा किया जाता है। देश में कुल सौलह हजार गौशालाएं हैं जिसमे से बारह हजार गौशालाएं जैन समाज द्वारा संचालित होती हैं। कुल निर्यात में 20% भागीदारी इनकी है।
भारत के खुदरा और थोक उद्योग में इऩका 15-20% हिस्सा है। 33% स्वर्ण और ज्वैलरी उद्योग में इनका योगदान है। इसके साथ ही अधिकांश प्रमुख समाचारपत्र जैनियों के स्वामित्व में हैं।

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