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कषाय रहित होकर व्रतों का पालन करेंः मुनिश्री आदित्य सागरजी

न्यूज सौजन्य-राजेश जैन दद्दू

इंदौर। श्रुत संवेगी श्रमण मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने सोमवार को समोसरण मंदिर, कंचन बाग में प्रवचन देते हुए कहा कि व्रतों के आचरण से पुण्य का आश्रव होता है और पुण्य के फल से जीव तीर्थंकर पद को प्राप्त कर सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को कषाय रहित होकर शुद्धि के साथ व्रताचरण करना चाहिए। अव्रती होकर नरक गति में उत्पन्न होने की अपेक्षा व्रतों का पालन करके स्वर्ग में जाना श्रेष्ठ है।
मुनिश्री ने आगे कहा कि व्रताचरण में कषाय के लिए कोई स्थान नहीं है। व्यवहार व मोक्षमार्ग के पालन में कषाय बाधक है। कषाय के वशीभूत व्यक्ति असंयमी हो जाता है और उसके व्रत भंग हो जाते हैं।
धर्मसभा को नगर गौरव मुनि श्री अप्रमित सागरजी ने भी संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग जैन होकर रात्रि भोजन करते हैं, वह सम्यकदृष्टि नहीं है। जब तक आप अपनी क्रिया आचरण और भावना आदि को नहीं सुधारेंगे तब कब तक तुम्हारा जैनधर्म में जन्म लेना सार्थक नहीं होगा। भाव शून्य क्रिया फलवती नहीं होती, इसलिए सम्यक दृष्टि बनने के लिए मिथ्या परिणामों के भावों को दूर कर आत्मा की भावना बनानी चाहिए।

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