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सफलता का मौन शिल्पकार है अनुशासन : प्रतिभा अवसर दिलाती है, अनुशासन शिखर तक पहुँचाता है


द्रोणगिरी निवासी कुमकुम जैन ने अनुशासन को जीवन की सफलता का मूल आधार बताते हुए कहा कि प्रतिभा अवसर दिला सकती है, लेकिन व्यक्ति को शिखर तक पहुँचाने का कार्य केवल अनुशासन करता है। उन्होंने आत्मानुशासन, समयपालन और संयमित जीवन को सफलता का वास्तविक सूत्र बताया। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।


मुरैना/द्रोणगिरी। द्रोणगिरी निवासी कुमकुम जैन ने अनुशासन पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अनुशासन कोई बंधन नहीं, बल्कि जीवन को सफल, संतुलित और सार्थक बनाने वाली अदृश्य शक्ति है। जो व्यक्ति स्वयं पर नियंत्रण करना सीख लेता है, उसके लिए सफलता के द्वार स्वतः खुल जाते हैं।

अनुशासन ही सफलता की आधारशिला

कुमकुम जैन ने कहा कि इतिहास के सभी महान व्यक्तित्व—ऋषि, मुनि, वैज्ञानिक, साहित्यकार, उद्योगपति, खिलाड़ी और राजनेता—अपनी प्रतिभा के साथ-साथ अनुशासित जीवन के कारण ही ऊँचाइयों तक पहुँचे। प्रतिभा जन्मजात हो सकती है, लेकिन उसे निखारने का कार्य अनुशासन ही करता है।

आत्मानुशासन से बनता है व्यक्तित्व

उन्होंने कहा कि अनुशासनहीन जीवन दिशा विहीन रथ के समान होता है। इसके विपरीत अनुशासित व्यक्ति अपने समय, विचार, व्यवहार और इच्छाओं पर नियंत्रण रखकर निरंतर प्रगति करता है। व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रतियोगी परीक्षाएँ अथवा आध्यात्मिक उन्नति—हर क्षेत्र में अनुशासन सफलता का प्रथम सूत्र है।

बचपन से संस्कारों की आवश्यकता

कुमकुम जैन ने कहा कि बच्चों में समयपालन, नियमित अध्ययन, व्यायाम और संतुलित दिनचर्या की आदतें बचपन से विकसित की जानी चाहिए। यही छोटे-छोटे संस्कार भविष्य में उनके व्यक्तित्व और सफलता की मजबूत नींव बनते हैं।

आचार्य विद्यासागर जी का जीवन प्रेरणा

उन्होंने पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका सम्पूर्ण जीवन संयम, समयपालन और आत्मानुशासन का जीवंत उदाहरण रहा। जो स्वयं पर शासन करना सीख लेता है, वही समाज का सच्चा मार्गदर्शक बनता है।

आज की सबसे बड़ी आवश्यकता

कुमकुम जैन ने कहा कि आज संसाधनों की नहीं, बल्कि आत्मानुशासन की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। मोबाइल या आधुनिक साधन दोषी नहीं हैं, बल्कि उनका अनुचित उपयोग हमारी कमजोरी है। यदि व्यक्ति स्वयं पर विजय प्राप्त कर ले, तो जीवन की अधिकांश कठिनाइयाँ स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

अनुशासन ही श्रेष्ठ साधना

उन्होंने कहा कि अनुशासन कोई बोझ नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने की सुंदर साधना है। यही वह दीपक है जो अंधकार में भी सही दिशा दिखाता है और साधारण व्यक्ति को असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँचा देता है।

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