समाचार

टीएमयू में आईसीएआर के साइंटिस्ट का अभिमत अब खेती में वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी : मृद्ध मृदा, आय वृद्धि एवं पर्यावरण संतुलन पर किसान गोष्ठी में विद्वानों ने किसानों के लिए लाभकारी उपाय बताए। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्याम सुंदर भाटिया की यह खबर…


तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज की ओर से ऑडी में किण्वित जैविक खाद-एफओएम से समृद्ध मृदा, आय वृद्धि एवं पर्यावरण संतुलन पर किसान गोष्ठी हुई। इसमें एक्सपर्ट्स और शिक्षाविदों का मुरादाबाद मंडल के धरतीपुत्रों के साथ सार्थक संवाद भी हुआ। वैज्ञानिकों ने हेल्दी फार्मिंग ही सेहत का मूल आधार बताया। 


मुरादाबाद। इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टिट्यूट-आईसीएआर दिल्ली के एग्रोनॉमी के हेड डॉ. संजय सिंह राठौर बोले-हेल्दी फार्मिंग ही सेहत का मूल आधार है। मृदा के स्वास्थ्य के लिए जैविक खादों का प्रयोग करना जरूरी है। खेती का वैज्ञानिक प्रबंधन करने से सभी समस्याओं का समाधान संभव है। डॉ. राठौर बोले, धरतीपुत्रों के पास भी ज्ञान का भंडार है। वे भी नवाचार करते हैं। हम उनके नवाचारों को वैज्ञानिक तरीकों से जोड़कर दीगर धरतीपुत्रों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने बताया कि नवाचार करने वाले धरतीपुत्रों को कृषि मेले में प्रोफेसर की पदवी से सम्मानित भी किया जाता है। मुरादाबाद जिले में 2 कृषि विज्ञान केंद्र होना अपने आप में बड़ी बात है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले पूसा कृषि मेले में मुरादाबाद मंडल के किसान भी शिरकत करेंगे।

संगोष्ठी में इनकी सहभागिता रही। 

डॉ. राठौर तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान- आईएआरआई, नई दिल्ली के सस्य विज्ञान संभाग की ओर से ऑडी में किण्वित जैविक खाद-एफओएम से समृद्ध मृदा, आय वृद्धि एवम् पर्यावरण संतुलन पर किसान गोष्ठी में बतौर विशिष्ट अतिथि बोल रहे थे। इससे पूर्व मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर आईसीएआर की ओर से डॉ. संजय सिंह राठौर, डॉ. ऋषिराज सिंह, डॉ. प्रवीन कुमार उपाध्याय, मुरादाबाद के डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर डॉ. ऋषिकांत सिंह, जॉर्डस के एमडी डॉ. दीपक मेंदीदत्ता, टीएमयू एग्रीकल्चर कॉलेज के डीन प्रो. पीके जैन, मुख्य समन्वयक डॉ. अनिलकुमार चौधरी की मौजूदगी रही।

किण्वित जैविक खाद एफओएम में जैविक खाद से ढाई गुना पोषक तत्व

आईसीएआर के साइंटिस्ट डॉ. ऋषिराज सिंह ने कहा कि किण्वित जैविक खाद- एफओएम में जैविक खाद से ढाई गुना पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह मृदा के पीएच मान को न्यूट्रल बनाए रखता है। एफओएम के उपयोग से मृदा स्वास्थ्य, मृदा उर्वरकता, मृदा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के संग-संग पर्यावरण संरक्षित और संतुलित रहता है। लाभदायक सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि होती है। फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता में भी सुधार होता है। इसका प्रयोग करना भी बेहद आसान है। रासायनिक खादों का प्रयोग 20 से 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

बीजारोपण करना समय की मांग 

आईसीएआर के साइंटिस्ट डॉ. प्रवीन कुमार उपाध्याय ने कहा, कृषि की नई तकनीकों, नवाचारों को किसानों तक पहुंचाना और इनका बीजारोपण करना समय की मांग है। स्वस्थ रहने के लिए मृदा स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। स्वस्थ मृदा से ही स्वस्थ फसल, स्वस्थ पशु और स्वस्थ मानव जीवन संभव है।

कृषि और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक

मुरादाबाद के डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर डॉ. ऋषि कांत सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि किसानों को कृषि विभाग की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं एवं् सुविधाओं की जानकारी देकर वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का आह्वान किया। कृषि विज्ञान केन्द्र, मुरादाबाद के डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि कृषि और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं। खेती के साथ पशुपालन करने से लाभ बढ़ेगा और समय का सदुपयोग होगा।

धरतीपुत्रों के हाथों में देश की असली शक्ति 

कृषि विज्ञान केन्द्र, मुरादाबाद के डॉ. विश्वेन्द्र सिंह ने किसान सारथी ऐप के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि किसानों को हमेशा उन्नत बीजों का प्रयोग ही करना चाहिए। उन्होंने गन्ना और धान में लगने वाले विभिन्न रोगों और उनके रोकथाम के बारे में धरतीपुत्रों को जैविक समाधान के बारे में बताया। डीन प्रो. पीके जैन ने किसानों को देश की रीढ़ की हड्डी बताते हुए कहा कि धरतीपुत्रों के हाथों में देश की असली शक्ति है।

इनकी भी सहभागिता सराहनीय रही

गोष्ठी में टीएमयू एग्रीकल्चर कॉलेज के साइंटिस्ट डॉ. बलराजसिंह, डॉ. महेश सिंह, डॉ. गणेश दत्त भट्ट, डॉ. पुलकित चौधरी, डॉ. आशुतोष अवस्थी, डॉ. डीपी सिंह, कुसुम फरसवान के संग-संग डॉ. राजीवकुमार सिंह, डॉ. कपिला शेखावत, डॉ. सुभाष बाबू, डॉ. मोना नगरगड़े, डॉ. विशाल त्यागी, डॉ. अर्जुन सिंह, डॉ. स्मृति रंजन पधान के अलावा 150 से अधिक धरतीपुत्रों की मौजूदगी रही। समापन राष्ट्रगान के संग हुआ। संचालन डॉ. इशिता मिश्रा ने किया।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shree Phal News

About the author

Shree Phal News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page