इंदौर के समर्थ सिटी स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में श्रुत पंचमी पर्व श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रुत स्कन्ध विधान का आयोजन कर ग्रंथराज श्री षट्खण्डागम जी की स्थापना की गई तथा जिनवाणी माता की विशेष आराधना की गई।
इंदौर। जैन धर्म के ज्ञान आराधना महापर्व श्रुत पंचमी के अवसर पर श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, समर्थ सिटी में विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ।
जिनवाणी माता की हुई व्यावृत्ति
श्रुत पंचमी की पूर्व संध्या पर मंदिर परिसर में जिनवाणी माता की व्यावृत्ति की गई। इस दौरान मंदिर में विराजमान समस्त ग्रंथों एवं जिनवाणियों को व्यवस्थित रूप से सुरक्षित कर यथास्थान विराजमान किया गया। श्रद्धालुओं ने ज्ञान के प्रतीक पवित्र ग्रंथों के संरक्षण एवं सम्मान का संकल्प भी लिया।
श्रुत स्कन्ध विधान का आयोजन
श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर मंदिर में विधि-विधानपूर्वक श्रुत स्कन्ध विधान का आयोजन किया गया। विधान के दौरान श्रद्धालुओं ने जिनवाणी माता की आराधना करते हुए अर्घ्य समर्पित किए तथा ज्ञान के महत्व का स्मरण किया।
ग्रंथराज षट्खण्डागम की स्थापना
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण जैन धर्म के प्राचीन एवं प्रामाणिक ग्रंथराज श्री षट्खण्डागम जी की स्थापना रही। श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं श्रद्धा के साथ ग्रंथराज की वंदना कर जिनवाणी के संरक्षण एवं अध्ययन का संकल्प लिया।
ज्ञान आराधना का दिया संदेश
मंदिर अध्यक्ष श्री शैलेष जैन ने बताया कि श्रुत पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, स्वाध्याय और आत्मकल्याण की प्रेरणा देने वाला महोत्सव है। जिनवाणी के अध्ययन एवं संरक्षण से ही धर्म की वास्तविक प्रभावना संभव है।
पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा तथा समाजजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।













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