महरौनी स्थित श्री 1008 अजितनाथ धाम जैन मंदिर में श्रुत पंचमी के अवसर पर मुनिश्री विकौशल सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में श्री श्रुत ज्ञान वर्धक विधान श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुआ। संगीतमय पूजन, प्रवचन एवं जिनवाणी आराधना के माध्यम से स्वाध्याय का संदेश दिया गया। पढ़िए राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट
महरौनी। श्रुत पंचमी के पावन एवं पुण्यदायी अवसर पर श्री 1008 अजितनाथ धाम जैन मंदिर में श्री श्रुत ज्ञान वर्धक विधान का भव्य एवं भक्तिमय आयोजन मुनिश्री विकौशल सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में सम्पन्न हुआ। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में धर्मावलंबियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही और पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा एवं ज्ञान आराधना से ओतप्रोत रहा।
मंगलाचरण के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाष्टक एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके पश्चात अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न कराई गई। विधानाचार्य बाल ब्रह्मचारी पारस भैया जी के निर्देशन में संगीतमय वातावरण के मध्य श्री श्रुत ज्ञान वर्धक विधान विधि-विधानपूर्वक सम्पन्न हुआ।
इन्द्र पात्रों ने निभाई धर्म प्रभावना में भूमिका
विधान में सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य वीरेंद्र डोगरया को प्राप्त हुआ। वहीं इन्द्र पात्र के रूप में प्रशन्न सिंघई, नितिन सतभैया, अनिल मिठया, अनिल सिलौनया, श्रीनिवास कठरया एवं डॉ. शतेन्द्र मलैया ने सहभागिता निभाई। सभी इन्द्रों ने मंगल कलश स्थापना कर धर्म प्रभावना में अपना योगदान दिया।
शास्त्र विराजमान एवं शांतिधारा का सौभाग्य
कार्यक्रम में शास्त्र विराजमान कराने का सौभाग्य दिगम्बर जैन पंचायत समिति के अध्यक्ष पवन मोदी एवं कोषाध्यक्ष अनिल सिलौनया को प्राप्त हुआ। वहीं शांतिधारा करने का सौभाग्य डॉ. राजकुमार पारौल एवं नितिन शास्त्री को मिला। इस अवसर पर निर्माण मंत्री सुनील डेवडिया के उत्तम स्वास्थ्य एवं मंगलमय जीवन की भी कामना की गई।
जिनवाणी ही आत्मकल्याण का मार्ग
अपने मंगल प्रवचनों में मुनिश्री विकौशल सागर जी महाराज ने कहा कि श्रुत ज्ञान ही आत्मकल्याण का वास्तविक मार्गदर्शक है। जिनवाणी के बिना सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की प्राप्ति संभव नहीं है। श्रुत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जिनवाणी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि जिस घर में शास्त्रों का अध्ययन और स्वाध्याय होता है, वहां संस्कार, सदाचार और आत्मिक उन्नति स्वतः विकसित होती है। आज का युग जानकारी का है, लेकिन आत्मज्ञान का नहीं। यदि जीवन में शांति, संतोष और मोक्षमार्ग की दिशा प्राप्त करनी है तो जिनवाणी का नियमित अध्ययन और मनन आवश्यक है।
भजनों से भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु
विधान के दौरान सुनील जैन एंड पार्टी द्वारा प्रस्तुत मधुर भजनों एवं संगीतमयी पूजन ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। श्रद्धालु भजनों की स्वर लहरियों पर भाव-विभोर होकर जिनेंद्र भक्ति में लीन दिखाई दिए।
विश्व शांति की मंगलकामना के साथ समापन
अंत में विश्व शांति, धर्म प्रभावना तथा समस्त प्राणियों के कल्याण की मंगलभावना के साथ श्री श्रुत ज्ञान वर्धक विधान का समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने जिनवाणी के अध्ययन, स्वाध्याय और धर्माचरण का संकल्प लेते हुए श्रुत पंचमी महापर्व को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया।













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