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श्रुत पंचमी महोत्सव पर भक्ति से सराबोर हुआ गणधर वलय विधान : आर्यिका विज्ञमति माताजी बोलीं— जिनवाणी ही आत्मज्ञान और मोक्षमार्ग की आधारशिला


आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में एम.डी. जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत में आयोजित गणधर वलय विधान के पांचवें दिन श्रुत पंचमी महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। आचार्य इन्द्रनंदी महाराज एवं आर्यिका संघ के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने जिनवाणी माता की आराधना कर गणधरों को अर्घ समर्पित किए। पढ़िए राहुल जैन की यह रिपोर्ट


आगरा। आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में एम.डी. जैन इंटर कॉलेज फील्ड के हॉल, हरीपर्वत में आयोजित गणधर वलय विधान के पांचवें दिन श्रुत पंचमी महा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम आचार्य 108 श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं 57 वर्षीय संयम साधना से साधित सिद्धांत रत्न, भारत गौरव, गणिनी शिरोमणि आर्यिका 105 श्री विशुद्धमति माताजी तथा विज्ञमति माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य में सम्पन्न हुआ।

भक्ति गीतों पर झूमे श्रद्धालु

संगीतकार ऋषि एंड पार्टी द्वारा प्रस्तुत भजनों की मधुर स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए धर्म आराधना का आनंद लेते नजर आए।

विधि-विधान से सम्पन्न हुआ गणधर वलय विधान

बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया जी के निर्देशन में भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न हुई। इसके पश्चात इंद्र-इंद्राणी सहित विधान के प्रमुख पात्रों ने संगीतमय वातावरण में पूजा-अर्चना कर अर्घ समर्पित किए।

विधान में सौधर्म इन्द्र यतेंद्र कुमार-अभिलाषा जैन, कुबेर राजेंद्र कुमार जैन-नीलम जैन लुहाड़िया, यज्ञनायक इन्द्र सुरेश कुमार-माया जैन, ईशान इन्द्र जिनेन्द्र कुमार-अनीता जैन, चक्रवर्ती इन्द्र सुबोध पाटनी-शची पाटनी, मोहन स्वरूप-नूतन जैन, रवि कुमार-बीना जैन, पदमचंद-प्रेमलता जैन, इन्द्र जितेंद्र कुमार-अंशु जैन, रमेशचंद-मधुलता जैन, वीरेन्द्र कुमार-पूनम जैन तथा राजेंद्र कुमार-विमलेश जैन परिवार ने विधान में सहभागिता निभाई।

नौ तीर्थंकरों के गणधरों को समर्पित किए अर्घ

श्रुत पंचमी महोत्सव के अवसर पर आयोजित गणधर वलय विधान में नौ तीर्थंकर भगवानों के गणधरों को श्रद्धापूर्वक अर्घ समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने जिनवाणी माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धर्म आराधना की।

जिनवाणी आत्मज्ञान का अमूल्य स्रोत

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विज्ञमति माताजी ने कहा कि श्रुत पंचमी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र है। आज ही के दिन आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबली द्वारा रचित षट्खण्डागम ग्रंथ की रचना पूर्ण हुई थी। इसी कारण जैन समाज इस दिन को जिनवाणी माता के महापर्व के रूप में मनाता है।

उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों की दिव्य वाणी ही जिनवाणी है, जिससे आचार्य, साधु और आर्यिकाएं ज्ञान प्राप्त कर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जिनवाणी का अध्ययन जीवन में सम्यक ज्ञान और सही दिशा प्रदान करता है।

आचार्य इन्द्रनंदी महाराज ने भी किया संबोधित

इस अवसर पर आचार्य श्री इन्द्रनंदी महाराज ने भी धर्मसभा को संबोधित करते हुए धर्म, संयम और स्वाध्याय के महत्व पर प्रकाश डाला। धर्मसभा का कुशल संचालन परिषद के महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार द्वारा किया गया।

अनेक समाजजन रहे उपस्थित

कार्यक्रम में पूर्व डिप्टी मेयर अशोक जैन, परिषद अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार, अर्थमंत्री राकेश जैन परदे वाले, उपमंत्री विमल जैन, अनंत जैन, प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू, प्रदीप जैन कागज वाले, मनीष जैन लवली, दीपक जैन, कुमार मंगलम जैन, प्रवीण जैन, पंकज जैन, सचिन जैन, शेखर जैन, प्रांजल जैन, बीना बैनाड़ा, सपना जैन, नूतन जैन, प्रभा जैन, अनीता जैन, दीपा जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित सकल जैन समाज बड़ी संख्या में उपस्थित रहा।

20 जून को होगा विश्व शांति महायज्ञ का समापन

मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 20 जून 2026 को प्रातः 7 बजे से मुनि संघ एवं आर्यिका संघ के सानिध्य में गणधर वलय विधान, शांतिधारा तथा विश्व शांति महायज्ञ का समापन समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

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