दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर के तत्वावधान में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, आचार्य श्री समयसागर जी महाराज एवं मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद से नौगामा में ‘श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह रिपोर्ट…
नौगामा। श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर के तत्वावधान में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, आचार्य श्री समयसागर जी महाराज एवं मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद से नौगामा में ‘श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर 7 से 14 जून तक आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में निरंतर गतिमान है। संस्थान सांगानेर से पधारे विद्वान कुशाल जैन शास्त्री (टोंक) एवं सिद्धार्थ जैन शास्त्री (रहनी) प्रतिदिन बच्चों और बड़ों को जिनवाणी की गंगा में डुबकी लगवा रहे हैं। शिविर की दैनिक गतिविधियों के अंतर्गत दोनों विद्वान भाइयों द्वारा प्रतिदिन प्रातः काल बच्चों को देव-शास्त्र-गुरु की पूजन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद दोपहर के सत्र में बच्चों के लिए विशेष रूप से ‘श्री भक्तामर स्तोत्र’ और ‘बालबोध भाग-2’ की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। सायं काल के सत्र में संगीतमय माहौल में बच्चों को विभिन्न धार्मिक भजन सिखाए जा रहे हैं, जिसमें बच्चे अत्यंत आनंद और उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं।
‘करणानुयोग’ का गूढ़ शिक्षण दे रहे
रात्रि कालीन सत्र में युवा, महिला एवं पुरुष वर्ग के लिए विशेष कक्षाओं का आयोजन हो रहा है, जिसमें सिद्धार्थ भैया द्वारा ‘करणानुयोग’ का गूढ़ शिक्षण और कुशाल भैया द्वारा ‘तत्वार्थसूत्र’ के छठवें अध्याय के माध्यम से ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में आस्रव (कर्म बंधन) से कैसे बचें’, इस विषय पर विशेष मार्गदर्शन दिया जा रहा है। शिविर को लेकर स्थानीय जैन समाज में अभूतपूर्व उत्साह है। सभी शिविरार्थी प्रतिदिन पूरी ऊर्जा के साथ कक्षाओं में सम्मिलित होकर धर्म लाभ ले रहे हैं और जिनधर्म की प्रभावना में निमित्त बन रहे हैं।













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