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श्रुतज्ञान की साधना का सजीव उदाहरण बनी परीक्षा : संस्कार और अनुशासन के साथ हुई संस्थान में रत्नाकर अवार्ड परीक्षा  


श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर व अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति भारत के तत्वावधान तथा महिला समिति राजस्थान व संयुक्त संभाग समिति के सहयोग से चल रहे संस्कार शिविरों के समापन पर सभी मंदिरों में आयोजित परीक्षाओं में प्रत्येक ग्रंथ में प्रथम स्थान प्राप्त करने वालों की रत्नाकर अवार्ड परीक्षा का आयोजन संस्कृत कालेज में शनिवार को हुआ। जयपुर से पढ़िए, यह खबर…


जयपुर। श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर व अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति भारत के तत्वावधान तथा महिला समिति राजस्थान व संयुक्त संभाग समिति के सहयोग से चल रहे संस्कार शिविरों के समापन पर सभी मंदिरों में आयोजित परीक्षाओं में प्रत्येक ग्रंथ में प्रथम स्थान प्राप्त करने वालों की रत्नाकर अवार्ड परीक्षा का आयोजन संस्कृत कालेज में शनिवार को हुआ। प्रचार-प्रसार प्रभारी पदम जैन बिलाला ने बताया की ये परीक्षा श्रुतज्ञान की साधना का सजीव उदाहरण लग रही थी।

बालिका छात्रावास की अधिष्ठात्री व्रती श्राविका शीला ड्योडा ने बताया कि करीब 250 विद्यार्थियों ने अवार्ड हेतु अपना भाग्य आजमाया। प्रत्येक ग्रंथ में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को इस अवार्ड में शील्ड, प्रमाण पत्र और नगद राशि स्व. पंडित रतनलाल बैनाडा की स्मृति में उनके परिवार की ओर से दी जाती है। परीक्षाओं की व्यवस्थाओं में सहयोगी संस्थान के मंत्री सुरेश कासलीवाल, जयपुर शिविर प्रभारी विनीता जैन, दीपिका बिलाला, अंजना जैन और चंदा सेठी ने कहा कि अवार्ड- मौखिक, श्रमण संस्कृति संस्कार भाग 1,2,3; छहढाला, भक्तामर, तत्वार्थ सूत्र, श्रावकाचार, द्रव्य संग्रह, इष्टोपदेश विषयों के लिए दिए जाएंगे। महिला समिति की अंचल अध्यक्षा शालिनी बाकलीवाल, कोषाध्यक्ष विद्युत लुहाड़िया ने बताया कि रविवार प्रातः सांगानेर संस्थान में भव्य सामूहिक समापन समारोह में यह अवार्ड दिए जाएंगे।

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