समाचार

32 साल का हुआ इंतजार खत्म: आंजना में आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश उमड़ा जनसैलाब


आंजना जैन समाज के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। ‘आंजना में आनंद भयो, साधना महोदधि रो विहार भयो’ के जयकारों के साथ पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। आंजना से पढ़िए, अजित कोठिया की रिपोर्ट…


आंजना। स्थानीय जैन समाज के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। ‘आंजना में आनंद भयो, साधना महोदधि रो विहार भयो’ के जयकारों के साथ पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। ठीक 32 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, मंगलवार सुबह ठीक 7:35 बजे आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज का ससंघ मांगलिक प्रवेश हुआ। सूरज की तपिश बढ़ने से पहले ही गुरुदेव के दर्शनों के लिए भक्तों की आंखें कृतज्ञता और भावुकता से नम हो गईं।

सैकड़ों भक्तों संग 11 किमी की अहिंसा पदयात्रा

आचार्य श्री ससंघ गढ़ी से विहार कर आंजना पहुंचे। इस दौरान उनके साथ परतापुर, गढ़ी, डडूका, बोरी, अरथूना, आंजना और मोर सहित आसपास के कई गांवों के सैकड़ों श्रद्धालु चल रहे थे। विशेष बात यह रही कि आचार्य श्री ने एक उपवास (बेला/तप) की अवस्था में 11 किलोमीटर की कठिन अहिंसा पदयात्रा पूरी की। आंजना आगमन पर अपार जनसमूह ने अत्यंत भक्तिभाव से गुरुदेव का पड़गाहन किया और आहार चर्या संपन्न हुई।

“चेहरे वही, उम्र बढ़ी… आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें”

जिनालय परिसर में आयोजित भव्य धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने समाज को आत्मनिरीक्षण की सीख दी। उन्होंने मार्मिक शब्दों में कहा कि साधु तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन आप वहीं के वहीं रह जाते हैं। आंजना में 32 साल बाद भी कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। हां, मंदिर जरूर नव-निर्माणाधीन है। इस बीच दादा-दादी चले गए, बच्चे बड़े हो गए। चेहरे वही हैं, बस उम्र बढ़ गई है। हमारी यही प्रेरणा और आशीर्वाद है कि अब समय रहते अपने आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें। सभा में आचार्य संघ के तपस्वी मुनि डॉ. सहज सागर जी महाराज का भी ओजस्वी मांगलिक प्रवचन हुआ, जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। आंजना के सकल जैन समाज द्वारा आचार्य संघ की अभूतपूर्व और ऐतिहासिक अगवानी की गई।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shree Phal News

You cannot copy content of this page