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झुमरीतिलैया का आंदोलित जैन समाज उतरा सड़क पर : ऐतिहासिक मौन रैली निकालकर जताया विरोध


जैन संतों की सुरक्षा को लेकर नगर में मौन रैली निकाली गई। इस अवसर पर दिए गए ज्ञापन में ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ बनाने की मांग की गई। यह रैली बड़ा जैन मंदिर स्टेशन रोड झंडा चौक पूर्णिमा टॉकीज ओवर ब्रिज होते हुए जैन मंदिर पहुंची।झुमरीतिलैया से पढ़िए, यह खबर…


झुमरीतिलैया। जैन संतों की सुरक्षा को लेकर नगर में मौन रैली निकाली गई। इस अवसर पर दिए गए ज्ञापन में ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ बनाने की मांग की गई। यह रैली बड़ा जैन मंदिर स्टेशन रोड झंडा चौक पूर्णिमा टॉकीज ओवर ब्रिज होते हुए जैन मंदिर पहुंची। राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान के अंतर्गत झुमरीतिलैया जैन समाज के महिला पुरुष बच्चों ने ऐतिहासिक मौन रैली में काला बिल्ला लगाकर अपना आक्रोश प्रकट किया। जैसा कि विदित है कि रीवा में पैदल चल रही दो जैन साध्वी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। ऐसा प्रतीत होता है कि यह लापरवाही ड्राइविंग का नतीजा था। सर्व प्रथम जैन मंदिर में 15 मिनट का णमोकार मंत्र का जाप किया। जैन साध्वी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु पर पूरे भारतवर्ष का जैन समाज आक्रोशित एवं आंदोलित है। सभी ने जैन साध्वी पूज्य आर्यिका माताजी के साथ हुई दुखद सड़क दुर्घटना और उसमें उनके असामयिक निधन के विरोध में अपनी गहरी वेदना और आक्रोश व्यक्त करने के लिए सड़कों पर उतर कर मौन धारण कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। जैन समाज के उप मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी ने बताया कि जैन साधु साध्वी पैदल पद विहार करते हैं। धर्म प्रभावना करते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर पैदल चलते वक्त उन्हें विशेष सुरक्षा सरकार को उपलब्ध करानी चाहिए। यह घटना केवल एक सामान्य सड़क दुर्घटना प्रतीत नहीं होती, बल्कि इसके पीछे गहरी साजिश की आशंका है। इसी के विरोध में और देश भर में पद विहार करने वाले जैन साधु-संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस महारैली का आह्वान किया गया है।

वार्ड पार्षद पिंकी जैन ने इस मौके पर कहा कि जैन संत हमेशा जीवन भर पूरे भारतवर्ष में पैदल भ्रमण करते हुए अहिंसा और शांति का पाठ पढ़ाते हैं। कभी भी वाहन का प्रयोग नहीं करते हैं परंतु,केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा उनके विहार के दौरान उन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं की जाती है। जिसके कारण सड़क पर चलने वाले भारी वाहन गाड़ी आदि से दुर्घटना हो जाती है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैदल चलने वाले के लिए एक सुरक्षा घेरा होना चाहिए। संपूर्ण जैन समाज केंद्र और सभी राज्य सरकारों से यह मांग करती है कि जैन साधु संतों की सुरक्षा नीति पर कानून बने उनके पैदल चलने पर उनके गंतव्य स्थान पर पहुंचने तक विशेष पुलिस सुरक्षा व्यवस्था बहाल की जाए। रैली के समापन पर समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा प्रशासन को देश के गृह मंत्री, मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

सख्त सुरक्षा के लिए आग्रह

ज्ञापन के माध्यम से सरकार के समक्ष यह मांग रखी गई कि जैन साध्वी माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज व डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित कर दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई हो। विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक और हाईवे तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था तत्काल लागू की जाए। राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बने भारत सरकार द्वारा पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय गाइडलाइन और सुरक्षा (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार की जाए। जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसक और पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं। वे किसी सुरक्षा साधन का उपयोग नहीं करते, इसलिए संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाए।

यह समाज जनउपस्थित रहे 

मौन रैली में सह मंत्री राज जैन छाबड़ा, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र जैन काला ,भंडारी सुनील जैन सेठी, समाज के वरिष्ट सदस्य सुरेश जैन झांझरी, सुशील जैन छाबड़ा, ललित जैन सेठी,जय कुमार जैन गंगवाल,सुनील जैन छाबड़ा, किशोर जैन पांड्या दिल्ली,संजय जैन,सुनील जैन अजमेरा, स्थानीय पंडित अभिषेक जैन शास्त्री,महिला समाज की अध्यक्ष नीलम जैन सेठी, सचिव आशा जैन गंगवाल, वीणा जैन झांझरी, जैन समाज के मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा, नवीन जैन मौजूद थे।

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