अभिजात गुरु पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के अभिजात शिष्य श्रुत संवेगी महा श्रमण आदित्य सागर जी महाराज का आज 40 वां अवतरण दिवस है। 24 मई 1986 को मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में पिता राजेश जी एवं माता वीणा जी जैन के घर आंगन में जन्मे सन्मति भैया आचार्य विशुद्ध सागर जी से 8 नवंबर 2011 को सागर में जैनेश्वरी दीक्षा लेकर मुनि श्री आदित्य सागर बन गए। पढ़िए, इंदौर की यह खबर…
इंदौर। अभिजात गुरु पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के अभिजात शिष्य श्रुत संवेगी महा श्रमण आदित्य सागर जी महाराज का आज 40 वां अवतरण दिवस है। 24 मई 1986 को मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में पिता राजेश जी एवं माता वीणा जी जैन के घर आंगन में जन्मे सन्मति भैया आचार्य विशुद्ध सागर जी से 8 नवंबर 2011 को सागर में जैनेश्वरी दीक्षा लेकर मुनि श्री आदित्य सागर बन गए, जो आज दिगंबर जैन संतों की श्रृंखला में प्रखर प्रवचनकार एवं मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में सारे देश में चर्चित हैं और अपनी सादगी, कठोर तपस्या, उत्कृष्ट वक्तत्व कला और युवा पीढ़ी को धर्म से जोड़ने वाले जीवन प्रबंधन (लाइफ मैनेजमेंट) के प्रवचनों के लिए भी देश-विदेश में प्रसिद्ध है। डॉ. जेनेंद्र जैन व राजेश जैन दद्दू ने कहा कि आपके प्रवचन केवल धार्मिक क्रियाओं तक सीमित न होकर व्यवहारिक जीवन को सुधारने पर केंद्रित होते हैं। सोशल मीडिया पर आप युवाओं के बीच एक आध्यात्मिक गुरु एवं मोटिवेशनल स्पीकर और यूथ आइकॉन के रूप में बेहद लोकप्रिय हैं। उच्च शिक्षित एवं बहु भाषा विद मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, कन्नड़, तमिल, मलयालम आदि 16 भाषाओं के ज्ञाता हैं एवं इन भाषाओं में कई ग्रंथों का सृजन भी कर चुके हैं। आपके व्यक्तित्व एवं कृतित्व में आपके दीक्षा गुरु आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज की छवि दिखाई देती है। आपने अपने गुरु से शिक्षा ही प्राप्त नहीं की वरन उनके ही सदृश्य स्वयं को श्रुत सेवा में निरंतर सक्रिय रखा है। आपका हर पल श्रुत संवेगी शब्द की जो भूमिका है उसे आप पूर्णतः निभा रहे हैं । आज आपके अवतरण दिवस पर हम भावना भातें हैं कि आपका रत्नत्रय सदैव कुशल मंगल रहे और लंबे समय तक हमें आपका सानिध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त होता रहे। इसी आशा और विश्वास के साथ आपके चरणों में कोटि-कोटि नमन।













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