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सच्चे सुख की प्राप्ति भीतर में है, बाहरी वस्तुओं में नहीं : मुनि श्री सुयत्न सागर जी महाराज ने कहा- मंदिरों में तीर्थंकरों की वीतराग मूर्तियां हमें देती हैं संदेश 


मुनि श्री सूयत्न सागर जी महाराज का मुंबई महानगर (बोरीवली) से णमोकार तीर्थ होते हुए तीर्थराज सम्मेद शिखर जी की ओर विहार चल रहा है। मुनिश्री का भव्य मंगल प्रवेश श्री महावीर जिनालय संगम नगर में हुआ। रास्ते भर समाजजनों ने मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया एवं आरती उतारी। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। मुनि श्री सूयत्न सागर जी महाराज का मुंबई महानगर (बोरीवली) से णमोकार तीर्थ होते हुए तीर्थराज सम्मेद शिखर जी की ओर विहार चल रहा है। मुनिश्री का भव्य मंगल प्रवेश श्री महावीर जिनालय संगम नगर में हुआ। रास्ते भर समाजजनों ने मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया एवं आरती उतारी। सतीश जैन ने बताया कि मुनि श्री सुयत्न सागर जी 1008 शिखर बंद मंदिरों के दर्शन करने का संकल्प लेकर वहां से निकले हैं और अभी तक उन्होंने 1300 किमी की पदयात्रा करते हुए 620 मंदिरों के दर्शन कर लिए हैं। मुनि श्री ने दर्शन का महत्व बताते हुए कहा कि जैन मंदिरों के दर्शन (देव दर्शन ) करने से आध्यात्मिक शांति, मानसिक एकाग्रता मिलती है और पुण्य का अर्जन होता है। नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है। मंदिरों में तीर्थंकरों की वीतराग मूर्तियां हमें बताती है कि सच्चे सुख की प्राप्ति भीतर (आत्मा ) में है, बाहर की वस्तुओं में नहीं।

आपने कहा कि सभी भक्तगण विहार एवं आहार में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ लें। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष विनय बाकलीवाल एवं महामंत्री देवेंद्र सोगानी ने सभी समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में इस कार्य में सम्मिलित होने की अपील की है। संगम नगर मंदिर पहुंचने पर मनोज जैन, सुबोध कासलीवाल, सतीश जैन, पारस जैन, प्रमोद जैन, अमित जैन, राहुल जैन आदि ने मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया।

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