जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर, पंचम चक्रवर्ती और द्वादश कामदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का त्रिविध कल्याणक (जन्म, तप और मोक्ष) महोत्सव शुक्रवार, 15 मई को देश भर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित रिपोर्ट…
इंदौर। जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर, पंचम चक्रवर्ती और द्वादश कामदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का त्रिविध कल्याणक (जन्म, तप और मोक्ष) महोत्सव शुक्रवार, 15 मई को देश भर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। मालवा की पावन धरा इंदौर सहित देशभर के समस्त दिगंबर जैन मंदिरों, जिनालयों और चैत्यालयों में इस पावन अवसर पर विशेष अनुष्ठान, महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा और विश्वशांति महायज्ञ विधान आयोजित किए जाएंगे। सकल जैन समाज ने इस त्रिकल्याणक महोत्सव की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं।
एक ही पावन तिथि पर तीन कल्याणक का संयोग
जैन पुराणों के अनुसार जेठ कृष्ण चतुर्दशी की पावन तिथि भगवान शांतिनाथ के जीवन में अद्भुत महत्व रखती है। इसी तिथि को उनका दीक्षा (तप) कल्याणक और मोक्ष कल्याणक हुआ था। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष उनका जन्म कल्याणक पर्व भी इसी समय के साथ जुड़कर त्रिकल्याणक महामहोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।
भगवान शांतिनाथ का जीवन वृत्त और तीनों कल्याणक
गर्भ एवं जन्म कल्याणक- हस्तिनापुर के इक्ष्वाकु वंशीय राजा विश्वसेन और माता ऐरादेवी (अचिरा) के आंगन में प्रभु का जन्म हुआ था। उनके गर्भ में आते ही पूरे राज्य में शांति की लहर दौड़ गई थी, इसलिए उनका नाम ‘शांतिनाथ’ रखा गया। वे 16वें तीर्थंकर होने के साथ-साथ तीन खंड के अधिपति पंचम चक्रवर्ती और कामदेव भी थे।
दीक्षा (तप) कल्याणक- राजसी वैभव, अटूट संपदा और चक्रवर्ती के सुखों का भोग करने के बाद एक दिन दर्पण में अपना रूप देखते समय भगवान को वैराग्य उत्पन्न हुआ। उन्होंने संसार की असारता को समझा और जेठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन हस्तिनापुर के सहस्राम्र वन में दीक्षा धारण कर ली। वे आत्म-साधना और कठिन तपस्या में लीन हो गए।
मोक्ष कल्याणक- कठिन तप और ध्यान के बल पर प्रभु ने केवलज्ञान प्राप्त किया। इसके बाद सम्मेद शिखरजी (पारसनाथ हिल) की पावन टोंक से जेठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन ही भगवान शांतिनाथ ने समस्त कर्मों का क्षय कर मोक्ष (निर्वाण) पद प्राप्त किया।
इंदौर सहित देश भर में धार्मिक अनुष्ठानों की धूम
इस महापर्व के अवसर पर इंदौर के कांच मंदिर, गोमटगिरी, दिगंबर जैन उदासीन आश्रम सहित सभी उपनगरीय जिनालयों में सुबह की वेला में देव-शास्त्र-गुरु पूजन होगा।
महामस्तकाभिषेक व शांतिधारा- स्वर्ण और रजत कलशों से भगवान का अभिषेक किया जाएगा। विश्वशांति महायज्ञ-विश्व में सुख, समृद्धि और शांति की कामना के लिए विशेष आहुतियां दी जाएंगी। लाडू समर्पणरू निर्वाण लाडू चढ़ाकर भक्त प्रभु के मोक्ष कल्याणक की खुशियां मनाएंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमरू संध्याकाल में महाआरती, भक्तांबर पाठ और जिनेंद्र भक्ति के सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। संत समाज और विद्वानों के अनुसार भगवान शांतिनाथ की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट, रोग, शोक और मानसिक अशांति दूर होती है। समस्त जैन समाज इस पावन दिवस पर उपवास, एकासन और सामायिक कर आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा।













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