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सिहोनिया में 15 मई को महामस्तकाभिषेक होगा: संगीतमय श्री 1008 शांतिनाथ विधान का पुण्य लाभ लेने की अपील 


चंबल संभाग के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ सिहोनियाजी में तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव विभिन्न धार्मिक सामाजिक कार्यक्रमों के साथ 15 मई को मनाया जाएगा। मुरैना/सिहोनिया से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना/सिहोनिया। चंबल संभाग के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ सिहोनियाजी में तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव विभिन्न धार्मिक सामाजिक कार्यक्रमों के साथ 15 मई को मनाया जाएगा। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी सिहोनियाजी ने बताया कि जैन समाज के उपासना स्थल अतिशय क्षेत्र सिहोनिया में विराजमान मूलनायक भगवान शांतिनाथ स्वामी के जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर जेठ बदी चौदस शुक्रवार 15 मई को प्रातः 7 बजे से मूलनायक भगवान शांतिनाथ स्वामी के सामूहिक अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह पूजन एवं प्रातः 8 बजे से संगीतमय श्री 1008 शांतिनाथ विधान का आयोजन एवं प्रातः 10 बजे से निर्वाण कांड का वाचन करते हुए सामूहिक रूप से निर्वाण लाडू अर्पित किया जाएगा। भगवान शांतिनाथ स्वामी का महामस्तकाभिषेक होगा। इस पावन अवसर पर आसपास के सभी नगरों से सैकड़ों की संख्या में साधर्मी बंधु सिहोनियाजी पहुंचकर तीर्थंकरों की आराधना, उपासना, पूजन, भक्ति करते हुए पुण्यर्जन करेंगे।

अम्बाह एवं मुरैना से निःशुल्क बसों की व्यवस्था 

आयोजन समिति द्वारा साधर्मी बंधुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सिहोनिया पहुंचने के लिए अम्बाह एवं मुरैना से निःशुल्क बसों की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले सभी समाजजनों के लिए आवास, स्वल्पाहार, भोजनादि की सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी कमेटी ने सभी साधर्मी बंधुओं से शुक्रवार 15 मई को अधिकाधिक संख्या में सिहोनियाजी पहुंचने की अपील की है। जिला मुख्यालय मुरैना से लगभग 33 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी में भूगर्भ से प्राप्त 11 वीं शताब्दी की खड्गासन भगवान शांतिनाथजी (16 फीट) की पाषाण की प्रतिमा मूलनायक के रूप में स्थापित हैं। उसके आजू बाजू में भगवान अरहनाथजी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की पत्थर से तराशी गई मूर्तियाँ स्थापित हैं। वर्तमान में भी गाँव में खुदाई के दौरान जैन तीर्थंकरों की ऐसी मूर्तियाँ मिलती रहती हैं। क्षेत्र पर एक संग्रहालय है, जिसमें प्राप्त सभी मूर्तियों को सहेजकर रखा गया है।

 जैन साधु संतों के निरंतर आगमन 

जैन तीर्थ एवं उपासना स्थल पर यू तो वर्षभर विभिन्न धार्मिक आयोजन होते रहते हैं एवं प्रतिदिन दूरदराज से साधर्मी बंधुओं का आवागमन होता रहता है। जैन साधु संतों के निरंतर आगमन से क्षेत्र की महत्ता को बल मिलता रहता है। अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी में प्रति वर्ष क्वार वदी दोज को वार्षिक मेले का आयोजन होता है और जेठ बदी चौदस को भगवान शांतिनाथ जी का निर्वाण महोत्सव मनाया जाता है।

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