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ताम्रपत्र पर अंकित 'षट्खण्डागम' : 1 मई शुक्रवार को होगा अवलोकन, स्वप्न हुआ साकार


दिगंबर जैन परंपरा के प्रथम लिपिबद्ध ग्रंथ शास्त्र षट्खण्डागम’ को चिरकाल तक सुरक्षित रखने का स्वप्न साकार हो गया है। आचार्य श्री पुष्पदंत जी एवं आचार्य भूतबली जी द्वारा रचित इस महान ग्रंथ को ताम्रपत्र पर अंकित कर संरक्षित किया गया है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। दिगंबर जैन परंपरा के प्रथम लिपिबद्ध ग्रंथ शास्त्र षट्खण्डागम’ को चिरकाल तक सुरक्षित रखने का स्वप्न साकार हो गया है। आचार्य श्री पुष्पदंत जी एवं आचार्य भूतबली जी द्वारा रचित इस महान ग्रंथ को ताम्रपत्र पर अंकित कर संरक्षित किया गया है। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ससंघ की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से यह ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।

शुक्रवार, 1 मई को पूर्णिमा शांतिनाथ भगवान के कलशाभिषेक के पावन अवसर पर यह ताम्रपत्र संस्करण समाजजनों के अवलोकनार्थ प्रस्तुत किया जाएगा। अशोक खासगीवाल, आजाद जैन ने समाज से आह्वान करते हुए कहा कि पधारकर ताम्रपत्रों पर लिखे ग्रंथ का अवलोकन कर अपने जीवन को धन्य करें।

कार्यक्रम:

दिनांक: शुक्रवार, 1 मई

समय: प्रातः 7:30 बजे से अवलोकन

स्थान: समवशरण मंदिर, कंचनबाग, इंदौर

षट्खण्डागम’ का महत्व 

यह इस युग का जिनागम का प्रथम लिपिबद्ध शास्त्र है। इसे ताम्रपत्र पर अंकित करना श्रुत संरक्षण एवं शासन प्रभावना की दिशा में मील का पत्थर है। इससे आने वाली पीढ़ियों तक जिनवाणी सुरक्षित रहेगी।

आयोजक श्री दिगंबर जैन समवशरण ट्रस्ट, इंदौर ने समस्त धर्मानुरागी बंधुओं से इस पावन अवसर पर पधारकर जिनवाणी दर्शन का लाभ लेने का अनुरोध किया है।

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