देवाधिदेव जैन युग के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान जी का जन्म जयंती महोत्सव मुनि श्री प्रणुत सागरजी महाराज की प्रेरणा और हम सभी के कर्तव्य भाव से 12 अप्रैल को पूरे विश्व में भव्य रूप से मनाना है। दाहोद से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर…
दाहोद (गुजरात)। देवाधिदेव जैन युग के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान जी का जन्म जयंती महोत्सव मुनि श्री प्रणुत सागरजी महाराज की प्रेरणा और हम सभी के कर्तव्य भाव से 12 अप्रैल को पूरे विश्व में भव्य रूप से मनाना है। मुनि श्री प्रणुत सागर जी ने सभी जैन इनफ्ल्यूएन्सर और क्रिएटर्स को संबोधित करते हुए कहा कि जब भी जैन धर्म की बात होती है तो केवल महावीर जयंती ही लोगों को क्यों याद रहती है? इस वर्ष मुनि श्री प्रणुत सागर महाराज जी की प्रेरणा से और हम सभी के कर्तव्य भाव से 12 अप्रैल को भगवान आदिनाथ जन्म जयंती दिवस को मनाई जाएगी। इसी विषय पर रविवार को 2 बजे,मुनि श्री प्रणुत सागर जी के सानिध्य में एक ऑनलाइन बैठक की गई। जिसमें जैन इनफ्ल्यूएन्सर और क्रिएटर्स ने अपने सुझाव दिए। गुरुजी ने भी अपना मार्गदर्शन प्रदान किया। भोपाल निवासी श्रेष्ठ जैन विशु भैया ने कहा कि अयोध्या में भगवान ऋषभदेव का जन्म हुआ था। मुनि श्री प्रणुत सागर जी का हम सभी को मार्गदर्शन मिला। अब उसके अनुरूप हमारी कार्यशैली को दिशा प्रदान करना अनिवार्य एवं आवश्यक है। लोगों में जागरूकता लाना है कि क्यों भगवान ऋषभदेव का जन्म कल्याणक मनाना आवश्यक है। भगवान ऋषभदेव का इतिहास जन-जन तक पहुंचना है। भगवान ऋषभदेव के जन्मोत्सव के लिए समाज को प्रेरणा देना है। आइए, हम सब मिलकर इस वर्ष आदिनाथ जन्म जयंती को पूरे भारत में गूंजायमान बनाएं।












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