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साधुओं पर शंका नहीं श्रद्धा रखें: उपाध्याय श्री विश्रुतसागरजी ने श्रद्धा और भावना का बताया महत्व 


इंदौर में जैन साधुओं के विराजमान होने से धर्म प्रभावना की अपार अनुभूति हो रही है। गुरुवार को उपाध्याय श्री विश्रुतसागर जी महाराज ने संबोधित किया। वे दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपतिनगर में विराजित हैं। उन्हें सुनने के लिए बड़ी संख्या में समाजजन आ रहे हैं। इंदौर से पढ़िए यह खबर…


इंदौर। जो साधु से मिलकर रहे वह भविष्य का भगवान है। साधुओं पर शंका नहीं करें। उन पर श्रद्धा रखें। जिसने निर्ग्रंथियों (मुनियों) को पहचान लिया और उनके प्रति सच्ची श्रद्धा और भावना रखी। वह सच्चा मोक्ष मार्गी है। यह उद्गार दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में आज उपाध्यक्ष श्री विश्रुतसागर जी महाराज ने प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भावना जिसकी अच्छी नहीं होती वह भगवान नहीं बन सकते। यदि अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त करना चाहते हो तो सम्यक दृष्टि बनो और देव शास्त्र गुरु पर श्रद्धा रखते हुए उनके वचनों को भी मानो। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि धर्मसभा को मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज ने भी संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि जीवन में शांति बाहर के वैभव से नहीं, क्रोध, मान, माया, लोभ कषाय से मुक्त होने और संयम धारण से मिलेगी। उन्होंने कहा कि असंयमी जीव तीव्र कषाय होते हैं। कसायों में मंदता आने पर ही जीव संयमी बनेगा और देव शास्त्र गुरु की शरण में रहेगा तो शांति सागर बनेगा। इसलिए अपने जीवन को संयम से श्रृंगारित कर अपना कल्याण करें। धर्म सभा में डॉ. जैनेंद्र जैन डॉ. वीसी जैन, शैलेंद्र सोनी, अरविंद सोधिया, प्रकाश पांड्या, सुनील सुरेंद्र जैन टारगेट आदि समाज जन उपस्थित थे।

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