आचार्य श्री मणिप्रभ सागर महाराज सानिध्य में हो रही आदिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत निकली भव्य शोभायात्रा एकता का पर्याय बनी, जो सर्वधर्म समभाव का एक प्रत्यक्ष उदाहरण प्रस्तुत कर गई। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…
रामगंजमंडी। आचार्य श्री मणिप्रभ सागर महाराज सानिध्य में हो रही आदिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत निकली भव्य शोभायात्रा एकता का पर्याय बनी, जो सर्वधर्म समभाव का एक प्रत्यक्ष उदाहरण प्रस्तुत कर गई। यह शोभायात्रा महज श्वेतांबर समाज की नहीं होकर दिगंबर समाज की नहीं होकर सभी धर्म की एक शोभायात्रा बन गई। इस भव्य शोभायात्रा में भानपुरा पीठ के शंकराचार्य श्री दिव्यानंद जी भी सम्मिलित हुए। स्टेशन चौराहे पर जैसे ही यह भव्य शोभायात्रा पहुंची श्री दिव्यानंद जी तीर्थ की आचार्य श्री से उनका समागम हुआ, जो अपने आप में सर्वधर्म समभाव की एक जीवंत कहानी कह रहा था। मानो लग रहा था कि यह आयोजन संपूर्ण रामगंजमंडी का हो गया, हो हर कोई बस प्रभु भक्ति में मगन दिखाई दे रहा था। महिला शक्ति, युवा शक्ति, बुजुर्ग और बच्चे सभी बस भक्ति में मगन दिखाई दे रहे थे। एक ओर उज्जैन से आए भक्त मंडल डमरू बजाते हुए चल रहे थे। पंजाब से आया पाइप बैंड अपनी अलौकिक प्रस्तुति दे रहा था। मानो लग रहा था कि आज साक्षात् अहिंसा शांति का जीवन संदेश परिलक्षित हो रहा हो।
कार्य की सफलता चाहिए तो शत्रु से भी मित्रता करनी चाहिए
जैसे ही यह शोभा यात्रा श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के समक्ष पहुंची तो दिगंबर जैन समाज के भक्त समूह द्वारा आचार्य श्री को वंदन किया गया एवं जैन श्वेतांबर श्रीसंघ अध्यक्ष श्री राजकुमार पारख का अभिनंदन किया आचार्य श्री ने श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के भी दर्शन किए और वे जिनालय को देख अभिभूत हुए साध्वी श्री ने भी दिगंबर जैन मंदिर के दर्शन किए एवं मंदिर के बारे में जाना। इसी कड़ी में यह शोभायात्रा महोत्सव स्थल राजकमल ऑयल मिल पर पहुंची, जहां आचार्य श्री के सानिध्य में प्रतिष्ठा की क्रिया के रूप में जाजम बिछाने की क्रिया की गई। इन मांगलिक पलों में भानपुरा पीठ के शंकराचार्य श्री दिव्यानंद तीर्थ ने कहा कि जीवन में अनुकूलता पाने के लिए पुरुषार्थ तो करना ही होगा। यदि हमें कार्य की सफलता चाहिए तो शत्रु से भी मित्रता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परोपकार तो करना लेकिन हिंसा से अपने को बचा के रखना। सृष्टि को जहर से बचाना और अपने को भी बचाना। कोई भी कार्य करने के लिए पहले आधार को मजबूत करना होगा आधार मजबूत नहीं होगा तो कोई भी काम टिकाऊ नहीं होगा।
मंदिर की सौंदर्य कला, शिल्प आकर्षक एवं मनमोहक
उन्होंने वृक्षारोपण करने की भी सीख प्रदान की साथ ही उन्होंने कहा आज की शोभायात्रा सर्वधर्म समभाव का एक अनुपम उदाहरण है। अपने-अपने इष्ट की आराधना के साथ जीवन की उत्कृष्टता को आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि सृष्टि सत्य से समाहित होकर बढ़ती है और दया दान से बढ़ती है दान से दरिद्रता नष्ट होती है धर्म किए बिना लोक परलोक की प्राप्ति नहीं होती। अपने आप में इतिहास की रचना होने जा रही है आचार्य श्री ने मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत कहा कि अपने आप में रामगंज मंडी में इतिहास की रचना होने जा रही है। उन्होंने मंदिर के विषय में कहा कि मंदिर की सौंदर्य कला, शिल्प आकर्षक एवं मनमोहक है। इतना जल्दी यह मंदिर बनकर तैयार हुआ यह बहुत बड़ी बात है।
एक दूसरे को सहयोग देना यही समरसता है
रामगंजमंडी नगर की तारीफ करते हुए कहा कि आज रामगंजमंडी धर्ममय हो चुका है ना कोई धर्म जाति का भेद नहीं रहा। उन्होंने कहा कि यह मंदिर जैन समाज का नहीं संपूर्ण रामगंजमंडी का है संत पर किसी का अधिकार नहीं होता संत सबके हैं संत धर्म के लिए जीता है। नगर ने एकता समन्वय का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। एक-दूसरे को सहयोग देना यही समरसता है, परमात्मा को हमें हृदय में बसाना है। हमारी जिंदगी का ड्राइवर भगवान है। हमे हृदय में भगवान को विराजमान करना चाहिए। प्रतिष्ठा महोत्सव पुण्य की टंकी भरने का अवसर लाया है। नब्बे वर्ष में यह अवसर आपके सामने आया है।













Add Comment