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फिजियोविज़न वैश्विक संगोष्ठी में नवाचार और शोध का उत्कृष्ट संगम : प्रतिभागियों ने शोध एवं नवाचारी विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए


तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से आयोजित दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के जाने-माने विशेषज्ञ जुटे। कॉन्फ्रेंस के पहले दिन 46 पोस्टर प्रजेंट, प्रोसिडिंग का विमोचन भी हुआ। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्याम सुंदर भाटिया की यह खबर…


मुरादाबाद। इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर, नई दिल्ली की प्रिंसिपल प्रो. चित्रा कटारिया ने आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली में फिजियोथेरेपी की बढ़ती भूमिका और न्यूरोलॉजिकल रिहैबिलिटेशन की गहन व्याख्या करते हुए कहा, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी जैसे जटिल मामलों में प्रारंभिक और संरचित फिजियोथेरेपी हस्तक्षेप, न्यूरोप्लास्टिसिटी आधारित तकनीकों और व्यक्तिगत रिहैबिलिटेशन प्लानिंग के जरिए न केवल कार्यात्मक क्षमता में सुधार लाया जा सकता है, बल्कि मरीजों के जीवन की गुणवत्ता, स्वतंत्रता और मानसिक सशक्तिकरण को भी बढ़ाया जा सकता है। वैज्ञानिक सत्र स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के बाद रिकवरी में सुधार में उन्होंने उन्नत फिजियोथेरेपी इंटरवेंशन्स, तकनीकी एकीकरण और दीर्घकालिक पुनर्वास रणनीतियों पर चर्चा की। प्रो. कटारिया तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से आयोजित दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस-फिजियोविज़न 1.0 के शुभारम्भ मौके पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं। इससे पूर्व प्रिंसिपल प्रो. चित्रा कटारिया ने बतौर मुख्य अतिथि, टीएमयू की डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, फिजियोथेरेपी विभाग की एचओडी प्रो. शिवानी एम. कौल, डेंटल एंड एलाइड साइंस की डायरेक्टर गवर्नेंस नीलिमा जैन आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके ऑडी में कॉन्फ्रेंस का शंखनाद किया। इस मौके पर प्रो. हरबंश दीक्षित, रविन्द्र देव आदि की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। इस अवसर पर कुल 46 पोस्टर भी प्रस्तुत किए गए, जिनमें प्रतिभागियों ने अपने शोध एवं नवाचारी विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस मौके पर कॉन्फ्रेेंस प्रोसिडिंग का विमोचन भी हुआ।

प्रतियोगी गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रेरित किया

डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने टीएमयू में फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों को रेखांकित करते हुए स्टूडेंट्स को शोध, नवाचार तथा प्रतियोगी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। साथ ही कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में क्लिनिकल एक्सपोजर और रिसर्च-आधारित लर्निंग का समावेश स्टुडेंट्स को भविष्य के लिए अधिक सक्षम बनाता है। एचओडी प्रो. शिवानी एम. कौल ने नॉवल्टी मीट्स रिहेबिलिटेशन एक्सीलेंस थीम के महत्व को बताते हुए कहा, फिजियोथेरेपी में नवाचार और उत्कृष्टता का समन्वय क्लिनिकल परिणामों को अधिक प्रभावी और रोगी-केंद्रित बनाता है। तकनीकी सत्रों में स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट शिवानी लाल ने लोड मॉनिटरिंग इन स्पोर्ट्स रिहैबिलिटेशन पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जबकि नवजोत त्रिवेदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करते हुए बताया, एआई टूल्स शिक्षा और क्लिनिकल प्रैक्टिस दोनों को अधिक प्रभावी और उन्नत बना रहे हैं। कॉन्फ्रेंस में डॉ. नंद किशोर साह, हिमानी, नीलिमा चौहान, डॉ. हरीश शर्मा, समर्पिता सेनापति आदि की भी मौजूदगी रही।

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