ग्रेटर बाबा स्थित श्री दिगंबर जैन नवग्रह जिनालय रविवार को भक्ति और आस्था के अनुपम रंग में रंगा नजर आया। अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के आशीर्वाद से और नरेंद्र शकुंतला वेद परिवार द्वारा आयोजित भव्य जिनसहस्त्रनाम और शांतिनाथ विधान में मंत्रोच्चार और संगीतमय भजनों के बीच श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। ग्रेटर बाबा स्थित श्री दिगंबर जैन नवग्रह जिनालय रविवार को भक्ति और आस्था के अनुपम रंग में रंगा नजर आया। अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के आशीर्वाद से और नरेंद्र शकुंतला वेद परिवार द्वारा आयोजित भव्य जिनसहस्त्रनाम और शांतिनाथ विधान में मंत्रोच्चार और संगीतमय भजनों के बीच श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरा जिनालय परिसर “जय शांतिनाथ” के जयकारों से गूंज उठा और सभी पुण्यार्जक भावविभोर हो गए।

मूर्ति प्राप्ति में विशेष सहयोग
मूर्ति की प्राप्ति मैं प्रशासनिक रूप से विशेष सहयोग भोपाल के रवीन्द्र जी कियावत एवं जयश्री कियावत का रहा। जिनका इस आयोजन में विशेष सम्मान किया गया।

चोरी के बाद लौटी प्रतिमाओं का विशेष पूजन
चोरी के बाद वापस आई भगवान की अतिशयकारी रजत और स्वर्ण प्रतिमाओं का ट्रेजर फेंटेसी इंदौर नगर में हाल ही में हुई पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत परम पूज्य मुनि श्री विमल सागर जी एवं अनंत सागर जी गुरुदेव के सानिध्य में एवं प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया जी बंडा के निर्देशन में मूर्ति का शुद्धिकरण किया गया तत्पश्चात आज रविवार के इस आयोजन में महत्वपूर्ण पहलू रहा पुनः यथास्थान पर मूर्तियों का महामस्तकाभिषेक। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व मंदिर से प्रतिमाएं और पूजन सामग्री चोरी हो गई थी। प्रतिमाओं के सकुशल लौटने पर समाज में हर्ष की लहर है। इसी उपलक्ष्य में महामस्तकाभिषेक के बाद वृहद शांतिधारा का आयोजन कर विश्व मंगल की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने इसे भगवान पार्श्वनाथ का चमत्कार बताया।
पंडित नितिन झांझरी ने कराया विधान
विधानचार्य पंडित नितिन झांझरी के सान्निध्य में संपूर्ण शांतिनाथ विधान विधि-विधान से संपन्न हुआ। विधान की शुरुआत सकलीकरण से हुई, जिसके बाद इंद्र स्थापना, मंडप स्थापना और शुद्धिकरण जैसी प्रमुख क्रियाएं की गईं। इस पावन अवसर पर सौधर्म इंद्र की भूमिका सूरजमल सुशीला, संजय रेखा जैन ने निभाई। प्रथम कलश का सौभाग्य विनोद शोभा जैन और शांतिधारा का सौभाग्य नरेंद्र शकुंतला, अनुराधा, गिरीश अंजु, अनुराग प्राशी, अर्हम वेद परिवार ने प्राप्त किया। शेष इंद्र बनने का सौभाग्य सुभाष कासलीवाल, अशोक काला, गजेंद्र जैन, सचिन जैन, नितिन झांझरी परिवार को प्राप्त हुआ। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने अर्घ्य समर्पित कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
भक्ति में डूबा जैन समाज
संगीतमय विधान में भक्ति की ऐसी सरिता बही कि बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी उसमें लीन हो गए। ढोल-मंजीरों और भजनों के बीच श्रद्धालु झूमते नजर आए। इस दौरान सभी आचार्यों, मुनियों और साधुओं की विशेष आराधना भी की गई। भक्ति, आराधना और पूजन का यह क्रम घंटों तक चलता रहा।
ये गणमान्य रहे उपस्थित
आयोजन में वेद परिवार से नरेंद्र शकुंतला वेद, निखिल वेद और नरेंद्र वेद के आठ वर्षीय पोते अर्हम सहित पूरा परिवार शामिल हुआ। साथ ही कमल काला, रेखा संजय जैन, विनोद शोभा जैन, सुभाष कासलीवाल, हितेश नयना, रितेश पिंकी कासलीवाल, राजेश जैन, नीता जैन, कमलेश टीना जैन, नकुल पाटोदी, अंकुल पाटोदी, संजय सपना पापड़ीवाल, महेंद्रजी समेत बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। सभी ने एक साथ मिलकर विश्व शांति की प्रार्थना की।
आस्था को मिली नई ऊर्जा
पंडित नितिन जी झांझरी ने बताया कि प्रतिमाओं के लौटने और उनके अभिषेक से समाज को नई आध्यात्मिक ऊर्जा मिली है। शांतिधारा के माध्यम से न केवल मंदिर परिसर बल्कि पूरे क्षेत्र में सकारात्मकता का संचार करने का प्रयास किया गया। श्रद्धालुओं के चेहरों पर अभिषेक के बाद संतोष और आनंद स्पष्ट दिखाई दे रहा था। रविवार को हुए इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंदौर का जैन समाज अपनी परंपराओं और आस्था के प्रति कितना समर्पित है। शांतिनाथ विधान के माध्यम से दिया गया शांति और अहिंसा का संदेश समाज को एक नई दिशा दे गया।













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