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गिरनार जी यात्रा 9 जुलाई को इंदौर पहुंचेगी: दिगंबर जैन समाज ने संरक्षण की मांग दोहराई  


दिगंबर जैन समाज के लिए गुजरात स्थित गिरनार जी पर्वत आस्था का सर्वाेच्च केंद्र है। इसी पवित्र स्थान पर 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक हुआ था। जैन धर्म में गिरनार जी को ‘रेवतगिरि’ के नाम से भी जाना जाता है और यहां भगवान नेमिनाथ के कुल पांच कल्याणक हुए हैं – गर्भ, जन्म, दीक्षा, ज्ञान और मोक्ष कल्याणक। इसी कारण दिगंबर जैन समाज की आस्था इस तीर्थ से अत्यंत गहराई से जुड़ी हुई है। आज पढ़िए, इंदौर ब्यूरो डेस्क की यह रिपोर्ट….


इंदौर। दिगंबर जैन समाज के लिए गुजरात स्थित गिरनार जी पर्वत आस्था का सर्वाेच्च केंद्र है। इसी पवित्र स्थान पर 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक हुआ था। जैन धर्म में गिरनार जी को ‘रेवतगिरि’ के नाम से भी जाना जाता है और यहां भगवान नेमिनाथ के कुल पांच कल्याणक हुए हैं – गर्भ, जन्म, दीक्षा, ज्ञान और मोक्ष कल्याणक। इसी कारण दिगंबर जैन समाज की आस्था इस तीर्थ से अत्यंत गहराई से जुड़ी हुई है। विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन के नेतृत्व में इस वर्ष भी विशाल ‘नेमि-गिरनार धर्म यात्रा’ का आयोजन किया गया है। यह यात्रा देशभर से बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबियों को साथ लेकर चल रही है। यात्रा 9 जुलाई को इंदौर पहुंचेगी। इंदौर में यात्रा के स्वागत-अभिनंदन की जोरदार तैयारियां की जा रही हैं। आयोजकों के अनुसार रीगल चौराहे पर स्थित ऐतिहासिक कीर्ति स्तंभ पर यात्रा का भव्य स्वागत किया जाएगा। इंदौर में विराजित साधु-संतों के सानिध्य में कीर्ति स्तंभ से यह यात्रा राजवाड़ा की ओर प्रस्थान करेगी।

’क्यों महत्वपूर्ण है गिरनार जी यात्रा?’  

गिरनार जी केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भगवान नेमिनाथ की तपोभूमि और मोक्ष भूमि है। मान्यता है कि भगवान नेमिनाथ ने यहीं से 700 मुनियों के साथ मोक्ष प्राप्त किया। दिगंबर परंपरा में इसे ‘सिद्ध क्षेत्र’ का दर्जा प्राप्त है। इसी कारण हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पैदल यात्रा कर पुण्य अर्जित करते हैं।

क्या है विवाद?  

पिछले कुछ वर्षों से गिरनार जी तीर्थ को लेकर विवाद गहराया है। दिगंबर जैन समाज का कहना है कि गिरनार जी के कुछ हिस्सों पर अन्य समुदायों द्वारा अतिक्रमण और निर्माण किए जा रहे हैं, जिससे तीर्थ की मूल पहचान और प्राचीन स्वरूप प्रभावित हो रहा है। समाज की मांग है कि गिरनार जी को ‘जैन तीर्थ क्षेत्र’ घोषित कर इसके संरक्षण और जीर्णाेद्धार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। विश्व जैन संगठन इस मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों से लगातार पत्राचार और आंदोलन कर रहा है। इंदौर पहुंच रही यह धर्म यात्रा इसी संरक्षण आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगी। यहां उल्लेखनीय है कि इंदौर से भी बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज के श्रद्धालुगण गिरनार जी पहुंचकर 20 जुलाई को भगवान नेमिनाथ जी का महामस्तकाभिषेक और शांतिधारा कर निर्वाण लाडू अर्पित करेंगे। यहां देशभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

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