संस्कारों और संस्कृति की पावन नगरी इंदौर के वैभव नगर कनाडिया रोड में अध्यात्म का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। अवसर है भगवान चंद्रप्रभ की दिव्य स्फटिक प्रतिमा के ‘लघु पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव’ का, जिसका भव्य शुभारंभ शनिवार को घटयात्रा, ध्वजारोहण, मंडप शुद्धि और इंद्र प्रतिष्ठा के साथ हुआ। वैभवनगर इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। संस्कारों और संस्कृति की पावन नगरी इंदौर के वैभव नगर कनाडिया रोड में अध्यात्म का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। अवसर है भगवान चंद्रप्रभ की दिव्य स्फटिक प्रतिमा के ‘लघु पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव’ का, जिसका भव्य शुभारंभ शनिवार को घटयात्रा, ध्वजारोहण, मंडप शुद्धि और इंद्र प्रतिष्ठा के साथ हुआ।

भक्ति के स्वरों और मंत्रों की गूंज के बीच यह तीन दिवसीय महोत्सव 11 मई तक श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा।10 मई रविवार को जन्म एवं तप कल्याणक प्रातः 6 बजे से दीक्षा विधि एवं दिव्य ध्वनि का आयोजन होगा। 
दो महान विभूतियों को समर्पित ‘श्रीफल गौरव दिवस’
यह महोत्सव ‘श्रीफल गौरव दिवस’ के रूप में विशेष महत्व रखता है। यह आयोजन अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागरजी महाराज के पावन दीक्षा दिवस एवं जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी के अवतरण दिवस के मंगल अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। मुनि श्री के सानिध्य ने पूरे वातावरण को संयम और तप की ऊर्जा से भर दिया है।

मंगल घटयात्रा और भक्ति नृत्य की छटा
महोत्सव का आगाज सुबह 6:30 बजे मंगल घटयात्रा के साथ हुआ। केसरिया वस्त्रों में सुसज्जित महिलाएं सिर पर मंगल कलश लिए भक्ति गीतों पर झूमती नजर आईं, तो वहीं पुरुष वर्ग ने भक्ति नृत्य के माध्यम से अपनी अगाध श्रद्धा प्रकट की। इस दौरान पूरा वैभव नगर क्षेत्र ‘जय जिनेंद्र’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

मुनि श्री की देशना: ‘पंचकल्याणक है निर्वाण का मार्ग’
प्रथम दिन की सभा में अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागरजी महाराज की मंगल देशना (प्रवचन) हुई। मुनि श्री ने लघु पंचकल्याणक का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए कहा कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया है।

उन्होंने सौभाग्यशाली श्रावकों को बताया कि इंद्र बनने का अवसर पूर्व जन्मों के पुण्य से मिलता है, जो अंततः जीव को निर्वाण (मोक्ष) के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।

विधि-विधान और ध्वजारोहण
ध्वजारोहण पुण्यार्जक मेघा-अमित जैन परिवार ने मुनि श्री के सानिध्य में विधि-विधान से ध्वज पूजन कर ध्वजारोहण किया। धर्म ध्वजा फहराते ही भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। बाल ब्रह्मचारी सुनील भैया (अनंतपुरा) के कुशल निर्देशन में यागमंडल विधान और इंद्र प्रतिष्ठा की सभी क्रियाएं संपन्न हुईं। मुनि श्री के मुखारबिंद से उच्चारित मंत्रों ने समूचे पांडाल को सकारात्मकता से सराबोर कर दिया।

संयम के नियम और संगीत की प्रस्तुति
सुनील भैया ने सभी पुण्यार्जक परिवारों को लघु पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान पालन किए जाने वाले विशेष नियमों का संकल्प दिलाया।

कार्यक्रम के दौरान संगीतकारों ने भजनों की ऐसी प्रस्तुति दी कि पांडाल में मौजूद हर श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गया। आस्था, भक्ति और समर्पण के इस अपूर्व संगम ने इंदौर की धर्मधरा को पुनः गौरवान्वित किया है।

इस धर्म प्रभावना के कार्य में अनेक श्रद्धालु परिवारों ने पुण्यार्जन किया है। लघु पंचकल्याणक महोत्सव में माता-पिता प्रकाशचंद्र राजकुंवर मादावत , सौधर्म इंद्र अर्पिता संदीप मादावत, धनपति कुबेर शिल्पा पियूष गांधी, महायज्ञनायक प्रीति संजय जैन, यज्ञ नायक आभा अनिल जैन, मूर्ति पुण्यार्जक अर्चना अनिल, त्रिशला अनिमेष मादावत, निलय अनिल मादावत,अनिका अनिमेष मादावत, ईशान इंद्र प्रतीक्षा गौरव जैन, सनतकुमार इंद्र सुनीता अशोक पालरिया, माहेंद्र इंद्र स्वाति रितेश जैन, ब्रह्म इंद्र डॉ. विनीता हेमंत जैन, लंतव इंद्र शिल्पा नितेश जैन, भागलपुर, महाशुक्र इंद्र विजयलक्ष्मी जे.के जैन जज साहब,सहस्रार इंद्र रीता दिलीप वैद्य मिलन हाईट्स, आणत इंद्र प्रीति विनोद जैन, प्राणत इंद्र सीमा संजय, सम्यक जैन, आरण इंद्र खुशबू श्रीपाल जैन, अच्युत इंद्र सपना दीपक मादावत, रजत द्रव्य कर्ता शिवानी सचित जैन, द्रव्य पुण्यार्जक रूबी मुकेश जैन,आर.के जैन, डिम्पल मनोज रामावत ,आशा कमल कुमार जैन नगर निगम,महामुनिराज को पिच्छि भेट कर्ता नीता के.के. जैन , महामुनिराज को कमंडल भेटकर्ता नीता विनीत अजमेरा को सौभाग्य ने विधान में अर्घ्य अर्पित किए। कार्यक्रम के मंडप उद्घाटन नितेश प्रिया जैन द्वारा और कार्यक्रम में संगीतकार संगम जैन में भजन प्रस्तुत किए ।














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