बुलढाणा जिले के चिखली स्थित श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर में इन दिनों भक्ति और अध्यात्म की अविरल धारा बह रही है। माँ जिनवाणी महिला मंडल, चिखली के कुशल और व्यवस्थित नियोजन में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर महामंडल विधान का 18वां दिन रविवार को अत्यंत हर्षाेल्लास और सानंद संपन्न हुआ। चिखली से पढ़िए, यह खबर…
चिखली (बुलढाणा, महाराष्ट्र)। बुलढाणा जिले के चिखली स्थित श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर में इन दिनों भक्ति और अध्यात्म की अविरल धारा बह रही है। माँ जिनवाणी महिला मंडल, चिखली के कुशल और व्यवस्थित नियोजन में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर महामंडल विधान का 18वां दिन रविवार को अत्यंत हर्षाेल्लास और सानंद संपन्न हुआ। यह भव्य धार्मिक अनुष्ठान गत 30 अप्रैल से लगातार आयोजित किया जा रहा है।
अपूर्व भक्ति भाव से झूम उठा समाज
आर्यिका पूर्णमती माताजी द्वारा रचित इस पवित्र विधान में संपूर्ण चिखली जैन समाज बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है। प्रतिदिन सुबह से ही मंदिर जी का प्रांगण मंत्रोच्चार, सुमधुर भजनों और ढोल-मंजीरों की थाप से गुंजायमान रहता है। समाज के श्रावक-श्राविकाएं शुद्ध वस्त्र धारण कर देव-शास्त्र-गुरु की आराधना में लीन हैं। श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा और भक्तामर महामंडल विधान के विशेष अर्घ्य समर्पित कर पूरा समाज अपूर्व भक्ति के सागर में गोते लगा रहा है।
पुण्य अर्जन और उज्ज्वल भाग्य का सुअवसर
इस आयोजन के माध्यम से चिखली का सकल जैन समाज न केवल जिनवाणी माँ की आराधना कर रहा है, बल्कि सामूहिक रूप से महान पुण्य का अर्जन कर अपने भाग्य को उज्ज्वल बना रहा है। माँ जिनवाणी महिला मंडल की पदाधिकारी और सदस्य इस 48 दिवसीय अनुष्ठान को ऐतिहासिक बनाने के लिए दिन-रात जुटी हुई हैं। समाज के वरिष्ठ जनों का कहना है कि ऐसे सामूहिक धार्मिक अनुष्ठानों से न केवल आत्मिक शांति मिलती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी में भी संस्कारों का बीजारोपण होता है। यह विधान आगामी दिनों में भी इसी तरह पूरी श्रद्धा और प्रभावना के साथ जारी रहेगा।













Add Comment