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साधुओं का स्नेह, प्रेम और वात्सल्य व्यक्ति को सद्मार्ग पर लगाता है : अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी के सानिध्य में 32 वें पुण्य स्मृति दिवस समारोह में छाई अनूठी भक्ति की छटा 


आचार्यश्री विमलसागर जी महाराज का 32 वां पुण्य स्मृति दिवस समारोह सोमवार को बड़ा गणपति के समीप श्री मोदीजी की नसिया में मनाया गया। इस पुण्य अवसर पर कई मांगलिक कार्यक्रम और संगीतमय भजनों पर अर्घ्य आदि अर्पित किए गए। कार्यक्रम में अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज और आर्यिका यशस्विनी माताजी ने गुणानुवाद सभा को संबोधित किया। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। आचार्यश्री विमलसागर जी महाराज का 32 वें पुण्य स्मृति दिवस समारोह में सोमवार को श्रद्धा भक्ति, आराधना का अपूर्व गर्व क्षण देखने में आया। अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के सान्निध्य में हुए इस समारोह में बड़ी संख्या में विमलसागर विधान पूजन में पुण्यार्जक परिवार मौजूद रहे। विनयांजलि और गुणानुवाद सभा में अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी ने आचार्य विमल सागर जी के चरित्र, कृतित्व और व्यक्तित्व पर गहराई से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में जितना देखें, सुने, चिंतन करें, मनन करें उतना कम है। आज हम जिस आचार्य परमेष्ठी का समाधि दिवस मना रहे हैं, मुझे नहीं लगता है कि पूरे देश में कोई ऐसा साधु हो, जो उनके वात्सल्य से अछूता रहा हो। क्योंकि साधुओं का स्नेह, प्रेम और वात्सल्य व्यक्ति को सद्मार्ग पर लगाता है। विनयांजलि सभा में आर्यिका श्री यशस्विनी मति माताजी ने भी आचार्य श्री विमलसागर जी के साथ बिताए पलों, क्षणों और उनके वात्सल्य से भरे उपकारों का स्मरण करते हुए अपनी भावांजलि में कहा कि जिनकी मन ही निर्मल था। जिनकी चर्या ही निर्मल थी। वे चलते-फिरते तीर्थ थे। वे चतुर्थकाल में होते तो मोक्ष को जाते। माताजी ने कहा कि शिष्य कैसा होना चाहिए। उनके शिष्य आचार्य श्री भरतसागर जी महाराज, आर्यिका स्यादवाद मति माताजी अन्य साधु विहार में चलते समय आगे-पीछे हो जाते थे।

यदि वे अपना कमंडल मांगते थे तो कहते थे कि जब गुरु ने नहीं दिया तो हम कैसे दें किन्तु आचार्य श्री कहते थे कि आर्यिका स्वादाद मति का कमंडल नहीं है। उसको अभिप्राय बहुत आता है। माताजी कंडल दे दो इसको। मेरी आज्ञा है। ये गुरु का वात्सल्य शिष्यों पर और भक्तों पर नहीं जैन धर्म के अनुयायियों पर था और भारत की जनता जो अहिंसा को मानने वाले जैन जनता और इतर जैन से भी वे जैन धर्म को ग्रहण करवाते थे। गुणानुवाद सभा में समाजसेवी कैलाश वेद ने भी आचार्यश्री के बारे में बताया और भजन प्रस्तुत किया। भोपाल से आए देवेंद्र शाह ने भी सभा को संबोधित किया। इस अवसर पर पार्षद राजीव जैन, इंदर सेठी सहित अन्य सम्मानित समाजजन मौजूद रहे। विनयांजलि और गुणानुवाद सभा का संचालन भक्ति से ओतप्रोत संचालन बाल ब्रह्मचारी तरूण भैया ने किया।

 वात्सल्य रत्नाकर विधान में चढ़ाए गए अर्घ्य 

बड़ा गणपति के समीप श्री मोदीजी की नसिया में सोमवार को आचार्यश्री विमलसागर जी के जयकारों से पूरा सभा मंडप गुंजायमान हो गया। इस अवसर पर पूर्ण भक्ति और आराधना के साथ संगीतमय मांगलिक कार्यक्रम संपन्न हुए। कार्यक्रम में अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज ने विमलसागर विधान में मंत्रोच्चार से आचार्यश्री के चरणों में अर्घ्य समर्पित करवाए। वात्सल्य रत्नाकर विमल सागर भक्त परिवार और सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से संयोजित इस कार्यक्रम में प्रातः स्मरणीय आचार्यश्री भरत सागर जी महाराज और गणनी आर्यिका श्री स्यादवाद मति माताजी के मंगल आशीर्वाद से सुबह 7 बजे से अभिषेक हुआ।

संगीतमय भजनों की प्रस्तुतियों से सभी भक्तजन भक्ति में रहे लीन

शाम साढ़े 6 बजे से 36 दीपकों के माध्यम से आचार्यश्री विमलसागर जी और श्री जी की संगीतमयी आरती की गई। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक म्यूजिकल तंबोला भी खेला गया। इस अवसर पर आर्यिका श्री यशस्विनी मति माताजी और आर्यिका श्री मनस्वनी मति माताजी का भी मंगल सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में संघस्थ बाल ब्रह्मचारी श्रद्धा दीदी ने भी विधान में मंत्र आदि के माध्यम से भक्ति का संचार किया। संगीतकार जैनम पंकज जैन की संगीतमय भजनों की प्रस्तुतियों से सभी भक्तजन भक्ति में झूम उठे। इस पूरे आयोजन के पुण्यार्जक परिवार अशर्फीलाल अशोककुमार, संजय नीलम, अनंतवीर्य जैन, वैशालिक ज्वेलर्स परिवार सराफा थे।

इनका सहयोग रहा। 

इस आयोजन को सफल बनाने और इसका पुण्यलाभ अर्जन में चंद्रप्रभु ज्वेलर्स, वात्सल्य रत्नाकर विमल सागर भक्त परिवार, सकल दिगंबर जैन समाज, पंच लश्करी गोठ मोदीजी की नसिया, शांतिनाथ दिगंबर जैन त्रिमूर्ति मंदिर कालानी नगर, शांतिनाथ दिगंबर जैन बीसपंथी मंदिर, विहर्ष भक्त मंडल, राष्ट्रीय खंडेलवाल (सरावगी ) दिगंबर जैन संगठन एवं महिला संगठन का अद्वितीय सहयोग रहा।

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