समाचार सम्मेदशिखर

पूज्य अन्तर्मना महाराज की महासाधना के 551 दिन पूरे- जैन धर्म के सबसे कम उम्र में ‘तपस्वी सिंह निष्क्रिय व्रत’ करने वाले मुनि प्रसन्न सागर जी


राजकुमार अजमेरा- इस विषम सर्दी में अपनी मौन साधना और सिंह निष्क्रिय व्रत करते हुए मौन वाणी से महाराज श्री ने ‘आज की उवाच’ में बताया – “बैठ अकेला दो घड़ी, भगवान के गुण गाया कर…मन मन्दिर में ये जीया, झाडू रोज लगाया कर..!”
आगत का करे स्वागत, विगत को दें विदाई

जिनके पास इरादे होते हैं, उनके पास बहाने नहीं होते हैं । यदि हम अपने हालातों को नहीं बदल सकते, लेकिन हम उन हालातों के प्रति अपनी सोच को बदल कर, सावधान तो हो ही सकते हैं । यह नया वर्ष, नये हर्ष के साथ, नयी उमंग और तरंग के साथ, नये जोश और जुनून के साथ, बड़ों के आशीर्वाद और सद्भाव के साथ शुरू कर सकें।

आज से एक संकल्प लें
. रोज एक पुण्य कार्य करेंगे और एक पाप, एक बुराई का त्याग करेंगे।
. रोज रात सोने से पहले आज की समीक्षा और कल की प्रतिक्षा करेंगे।
. रोज सोने से पहले आज के बैर विरोध को खत्म करें और कल की शुरूआत भाई चारे से प्रारंभ करें।
. जैसे हम रोज घर की सफ़ाई झाडू से और शरीर की सफाई साबुन शैम्पू से करते हैं, वैसे ही रात सोने से पहले मन की सफाई, आज जो भी बुरे कार्य किये हैं या हुये हैं उनका पश्चाताप करें।
. भगवान के नाम की साबुन से मन के मैल को धो डालें । यदि हम रोज सफाई करते हैं तो मन का दर्पण कभी मैला नहीं हो पायेगा और नया साल हँसते मुस्कुराते गुजर जायेगा ।
. रोज बुराई को विदाई दें,अच्छाई को स्वीकार करें.

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page