जैन संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली पिच्छी को लेकर दिए गए कथित बयान के विरोध में जैन समाज ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को एक करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है। समाज ने बयान को असत्य, भ्रामक और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया है। पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट।
इंदौर। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा जैन संतों के धार्मिक उपकरण पिच्छी को लेकर दिए गए कथित बयान के विरोध में देशभर के जैन समाज ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि समाज की विभिन्न संस्थाओं ने मेनका गांधी को एक करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है।
क्या है पूरा मामला
राजेश जैन दद्दू के अनुसार, हाल ही में दिगंबर जैन संत आचार्य श्री सौरभ सागर महाराज के दिल्ली प्रवास के दौरान मेनका गांधी ने जैन मुनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली मयूर पिच्छी के संबंध में कथित रूप से टिप्पणी की थी। समाज का आरोप है कि इस टिप्पणी में मोरों की हत्या कर पंख प्राप्त करने जैसी बात कही गई, जिसे जैन समाज ने तथ्यहीन और भ्रामक बताया है।
23 जून को भेजा गया कानूनी नोटिस
जानकारी के अनुसार, 23 जून को मुजफ्फरनगर के अधिवक्ता निपुण जैन के माध्यम से भारतवर्षीय सकल दिगंबर जैन समाज, जैन युवा संगठन, विश्व जैन संगठन, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ तथा श्री णमोकार महामंत्र समिति सहित विभिन्न संस्थाओं ने 10 पृष्ठों का विस्तृत कानूनी नोटिस प्रेषित किया है।
जैन समाज ने रखे अपने पक्ष
वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन ने कहा कि जैन धर्म की मूल आधारशिला अहिंसा है। जैन साधु-संत सूक्ष्म से सूक्ष्म जीव की रक्षा का संकल्प लेकर जीवन व्यतीत करते हैं। उन्होंने कहा कि पिच्छी में उपयोग होने वाले मोरपंख प्राकृतिक रूप से झड़े हुए पंख होते हैं और जैन परंपरा में किसी भी जीव को कष्ट पहुंचाना पूर्णतः निषिद्ध माना गया है।
नोटिस में रखी गई प्रमुख मांगें
कानूनी नोटिस में मेनका गांधी से 15 दिनों के भीतर कथित बयान वापस लेने, राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करने तथा जैन धर्म, जैन संतों और समाज के संबंध में लगाए गए आरोपों को असत्य और आधारहीन स्वीकार करते हुए स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की गई है।
एक करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग
नोटिस में समाज की धार्मिक प्रतिष्ठा एवं छवि को क्षति पहुंचाने के आरोप में एक करोड़ रुपये की मानहानि क्षतिपूर्ति का दावा भी किया गया है। समाज ने कहा है कि यदि यह राशि प्राप्त होती है तो इसका उपयोग जीव-दया, मानव सेवा, पर्यावरण संरक्षण, पक्षी संरक्षण, गौ-सेवा, अहिंसा प्रचार और धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों जैसे लोकहितकारी कार्यों में किया जाएगा।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
जैन समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में मांगों का पालन नहीं किया गया तो सक्षम न्यायालय में दीवानी एवं आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में धार्मिक भावनाओं को आहत करने, मानहानि और सामाजिक वैमनस्य फैलाने से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
समाज में व्यापक प्रतिक्रिया
नोटिस भेजे जाने के बाद देशभर के जैन समाज में इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने जैन धर्म और संत परंपरा के सम्मान की रक्षा के लिए एकजुटता व्यक्त करते हुए मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है।













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