दक्षिण भारत के गंगवंश एवं अन्य राज्य वंशों की महिलाओं ने जैन धर्म की प्रभावनाऔर मंदिरों की व्यवस्थाओं में तन-मन-धन से सहयोग दिया। इन धार्मिक महिलाओं ने न केवल...
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इस अवसर्पिणी युग का प्रारंभ ही स्त्री शक्ति के विकास एवं महत्व की सर्वाधिक महत्वपूर्ण आधारशिला है। प्रभु श्री आदिनाथ ने अपने ग्रहस्थावस्था में भी भोगभूमि से...
आधुनिकीकरण, भूमंडलीकरण के बीच महिलाओं का बदलता मानस पटल आधी आबादी को जागरूक एवं गतिशील बना रहा है। भारतीय समाज एवं संस्कृति में पुरुष-नारी दोनों की भूमिका को...
दिगम्बर जैन परम्परा के साधु की चर्चा आते ही मन-मस्तिष्क में कठोर तपस्वी, त्यागमूर्ति, संसार की समस्त क्रियाओं से उदासीन संत की छवि उभरती है। पुरूष संतो के साथ...
आदिपुराण में कहा गया है कि ‘कन्या रत्नात् परं नान्दय’ अर्थात् कन्यारत्न से बढ़कर कोई रत्न नहीं है। नारी की महत्ता उसके नारीत्व गुणों से है। श्रेष्ठ महापुरुषों...
कामां में हुए सात दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन के उपरांत आचार्य सुनील सागर महाराज ससंघ का शांतिनाथ दिगंबर जैन दीवान मंदिर से जम्बू स्वामी...
श्री कुंदकुंद कहान दिगम्बर जैन स्वाध्याय मंदिर ट्रस्ट द्रोणगिरि सेंधपा की ओर से संचालित श्री समंतभद्र शिक्षण संस्थान के नवीन भवन का भूमि पूजन किया गया है।...
आचार्य श्री सुनील सागर जी मुनिराज ससंघ का कामां पंचकल्याणक के उपरांत श्री महावीर जी होते हुए जयपुर की ओर मंगल विहार चल रहा है, जिसमें सीकरी शहर के नजदीकी गांव...
सुमतिधाम गोधा स्टेट में आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज की कृति वस्तुत्व महाकाव्य पर आयोजित विद्बत संगोष्ठी के दूसरे दिन गोष्ठी के तृतीय सत्र का शुभारंभ पंडित...








