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कर्म का बंध ही मनुष्य के सुख-समृद्धि और पाप-पुण्य का निर्धारण करता है : आर्यिका रत्न 105 श्री लक्ष्मी भूषण माताजी

धरगांव में आयोजित धर्मसभा में आर्यिका रत्न 105 श्री लक्ष्मी भूषण माताजी ने कहा कि मनुष्य के सुख-दुःख, पाप-पुण्य और समृद्धि का आधार उसके स्वयं के कर्म हैं।...

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