Tag - अपरिग्रह

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भगवान विमलनाथ जी का मोक्ष कल्याणक 8 जुलाई को: तप, संयम और अपरिग्रह के प्रतीक भगवान के निर्वाण आषाढ़ कृष्ण अष्टमी के दिन देशभर में होंगे भव्य आयोजन 

जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर भगवान श्री विमलनाथ जी का मोक्ष कल्याणक इस वर्ष 8 जुलाई, आषाढ़ कृष्ण अष्टमी को श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर इंदौर...

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धर्म का धन : श्रद्धा की अमानत, स्वार्थ का साधन नहीं : श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र ने पारदर्शिता और उत्तरदायित्व पर दिया जोर

श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र ने धर्मस्थलों में प्राप्त धन को समाज की श्रद्धा की अमानत बताते हुए उसके पारदर्शी और धर्मसम्मत उपयोग पर बल दिया। उन्होंने भगवान महावीर के...

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दीक्षा से दिशा तक : आचार्य विद्यासागर जी के 69वें दीक्षा दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि

आचार्य विद्यासागर जी महाराज के 69वें दीक्षा दिवस पर प्रस्तुत यह विशेष लेख उनके तप, त्याग, साहित्य, शिक्षा, स्वदेशी और मानवता के प्रति अमूल्य योगदान को स्मरण कर...

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प्रतिभाशाली बच्चे परिवार, समाज के उज्जवल भविष्य: सेवा न्यास के प्रतिभा सम्मान समारोह के संबंध में रखे विचार 

अपनों द्वारा, अपनों के सम्मान अथवा उत्साहवर्धन के लिए किए जाने वाले आयोजन किसी पर कोई अहसान नहीं होते, बल्कि ऐसे आयोजनों से समाज की प्रतिभाओं का उत्साहवर्धन...

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आर्यिका श्री वत्सलमती माताजी ने टोंक अतिशय क्षेत्र में किया वैराग्यमय केशलोचन : आचार्य वर्धमान सागर जी के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ तपपूर्ण केशलोचन भाविकों ने की अनुमोदना

टोंक अतिशय क्षेत्र में आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के सान्निध्य में आर्यिका श्री वत्सलमती एवं आर्यिका श्री प्रेक्षा मति माताजी ने अहिंसा एवं अपरिग्रह की...

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परिवर्तनशील संसार में अडिग: दिगंबर साधु-साध्वियों का अनुशासन

धरती पर शायद ही कोई जीवन दिगंबर जैन साधु-साध्वियों के विहार जितना कठोर, अनुशासित और आध्यात्मिक हो। जहाँ साधारण मनुष्य घर, संपत्ति और भौतिक सुखों के पीछे भागता...

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परिग्रह मुक्ति का मंगलकारी मुहूर्त है आकिंचन्य धर्म-मुनि विश्वसूर्य सागर जी : संपूर्ण परिग्रह का त्याग ही आकिंचन्य धर्म : मुनि साध्य सागर जी

सनावद में चल रहे चातुर्मास के दौरान पर्यूषण पर्व के 9वें दिन संत निलय में मुनि साध्य सागर जी महाराज और मुनि विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने ‘उत्तम आकिंचन्य धर्म’...

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सहारनपुर में दशलक्षण पर्व पर आचार्य श्री ने बताया त्याग का महत्व : संग्रहवृति दुःख का कारण है, “उत्तम त्याग धर्म” सुख का मार्ग – आचार्य विमर्शसागर

सहारनपुर में दशलक्षण पर्व के अंतर्गत आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा कि संग्रहवृति दुःख का कारण है और त्याग धर्म ही जीवन को सुखी बनाता है। निस्वार्थ दान और...

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आचार्य श्री ने किया केशलोचन, धर्मसभा में गूंजी वैराग्य की वाणी : ज्ञान आत्मा का दर्पण है -आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

टोंक नगर में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मंगल देशना देते हुए कहा कि ज्ञान आत्मा का दर्पण है जिसके द्वारा अपनी कमियों को सुधारा जा सकता...

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मुनि श्री संधान सागर महाराज ने किया 24 घंटे का प्रतिमायोग : भोपाल में एक ही आसन में ध्यानस्थ रहे मुनि श्री

भोपाल के श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनि श्री संधान सागर महाराज ने सोमवार प्रातः 5 बजे से लगातार 24 घंटे तक प्रतिमायोग साधना धारण की। वे 48 घंटे बाद ही...

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