भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में जैन दर्शन, साहित्य और संस्कृति का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। प्राकृत भाषा, आगम साहित्य और जैनाचार्यों के वाङ्मय ने...
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टोंक नगर में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मंगल देशना देते हुए कहा कि ज्ञान आत्मा का दर्पण है जिसके द्वारा अपनी कमियों को सुधारा जा सकता...








