द्रोणगिरी के जैन विद्वान अंशुल जैन शास्त्री ने अपने प्रेरक संदेश में कहा कि पद, प्रतिष्ठा और अधिकार से नहीं, बल्कि चरित्र, विनम्रता और श्रेष्ठ कर्मों से मनुष्य...
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अनादिकाल से ही जैन मुनि एवं आर्यिकाएं मूलाचार का पालन करते हुए पैदल विहार करती आ रही हैं। वे कभी वाहन का उपयोग नहीं करते, न ही चप्पल पहनते हैं। भीषण गर्मी हो...








