निज आत्मा पदार्थ जैसा स्वयं है वैसा जानना, देखना अथवा कहना उत्तम सत्य है। धर्म निज का भाव है अतः जिस ज्ञान अथवा वचन का स्वयं पर प्रभाव है वही उत्तम सत्य है।...
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आज उत्तम सत्य धर्म का दिन है। जहां क्षमा , मार्दव , आर्जव , शौच आत्मा का स्वभाव है , वहीं सत्य- संयम- तप त्याग इन गुणों को प्रगट करने के उपाय हैं , या कहें कि...
सत्य को अपनाने से व्यक्ति खुद की वास्तविकता और आत्मा की गहराई को समझ सकता है। यह आत्म-साक्षात्कार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होता है। सत्य को जानने और...
जैन धर्म में सत्य को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे सच्चाई और ईमानदारी के रूप में देखा जाता है। जैन ग्रंथों में सत्य को “सच्चा”...
जैन मंदिर में प्रथमाचार्य शिरोमणि आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के शताब्दी वर्ष व निमाड़ गौरव राष्ट्रीय सन्त वात्सलय वारिधि आचार्य वर्धमानसगरजी महाराज के 75वें...
दसलक्षण पर्व के उत्तम शौच धर्म के चौथे दिन आज प्रातः 1008 भगवान महावीर समवशण मंदिर, आदिनाथ मंदिर जी नसिया जी में प्रातः माता जी के सानिध्य में वागड़ के बड़े...
परदेशीपुरा दिगंबर जैन समाज एवं वीर बाहुबली सोशल ग्रुप द्वारा परम पूज्य आचार्य विप्रणत सागर जी महाराज के आशीर्वाद से पर्युषण पर्व सुगंध दशमी पर भगवान आदिनाथ जी...
पापों का पिता कोई है तो वह लोभ है । लोभ बड़ा खतरनाक होता है। लोभ अनर्थकारी होता है। लोभ सर्व- अनर्थो का मूल कारण है। लोभ ही पाप, हिंसा, मान, मायाचारी, चोरी...
दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम दिव्य तपस्वी राष्ट्र संत वात्सल्य सम्राट पलवल तीर्थ उपसर्ग...
अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज के सानिध्य में पर्युषण पर्व के चौथे दिन श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, संविद नगर, कनाडिया रोड पर बड़े ही हर्षोल्लास के...








