जो वस्तु जिस रूप में होती है, वह सदा शक्तिहीन को अपने पक्ष में करने का प्रयास करती है। यदि हमारा उपादान कमजोर है, तो निमित्त हमेशा उसे अपने अनुसार चला लेगा।...
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आचार्य शिरोमणी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 85 वर्षीय आर्यिका श्री तपनमति माताजी ने 20 दिसंबर 2024 को यम संलेखना धारण की। इस अवसर पर...
धर्म और धार्मिक आस्थाओं की रक्षा हमारा कर्तव्य है। जब धर्म के अनुयायियों को सहायता की आवश्यकता हो, तो हमें आगे बढ़कर मदद करनी चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास और...
संसार में फंसा मनुष्य क्रोधाग्नि, जठराग्नि के वशीभूत होकर भवभ्रमण करता है और अति संक्लेशों से मरकर नरकादि में गिर जाता है। यह मनुष्य भव और जिनधर्म असीम...
जैन धर्म के चार अनुयोग के माध्यम से हमें जीवन के उच्चतम उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक सिद्धांतों का ज्ञान मिलता है। ये शास्त्र न केवल हमें जीवन के...
पारसोला कस्बे में वात्सल्य वारिधि दिगंबर जैन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की यम संल्लेखनारत शिष्या, आर्यिका ज्योति मति माताजी का सम्यक समाधिमरण 16 दिसंबर...
श्री 1008 वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर भूधर तीर्थ श्रीकेशरियाजी से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर मूलनायक श्री 1008 वासुपूज्य भगवान की अत्यंत...
निगड़ी पुणे स्थित भगवान महावीर अहिंसा ट्रस्ट द्वारा आयोजित युगपुरुष भगवान आदिनाथ और उपसर्गविजयी भगवान पार्श्वनाथ जिंनबिंब पंचकल्याणक महामहोत्सव के अवसर पर...
जैन अतिशय क्षेत्र जैन धर्म के अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं। इन क्षेत्रों में जैन धर्म के भगवान महावीर और उनके पूर्वकल्याणकारक जिनेन्द्र देव के आध्यात्मिक...
समाधिसम्राट गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज एवं उच्चारणाचार्य श्री विनम्रसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से श्रमणी आर्यिका विश्रेयश्री माताजी के मंगल...








