मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने कहा कि यदि सभी धर्म समान हैं और सभी के अधिकार समान हैं तो देश में सभी धर्मों के लिए व्यवस्थाएं भी समान होनी चाहिए। मुनि श्री ने...
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संसार शरीर और भोगों से जब विरक्ति हो जाती है तो धन संपत्ति और पद से मोह समाप्त हो जाता है। यह उद्गार मुनि श्री संभवसागरजी ने जैनत्व का इतिहास बताते हुए व्यक्त...
मुनिश्री संभवसागर जी ने रविवार को बच्चों से संवाद किया। उन्हें आचार्य श्री विद्यासागर जी से जुडे़ संस्मरण सुनाए। उन्होंने हिन्दी को अपनाने और हिन्दी माध्यम में...








