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गलती और गलतफहमी दोनों ही हानिकारक हैं-श्री आदित्य सागरजीः प्रतिकूलताओं में जीने की आदत डालिए 

इंदौर में ससंघ विराजमान मुनिश्री आदित्य सागरजी मुनिराज प्रवचन की दुनिया में एक ऐसा नाम हैं, जिनकी लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। अखबारों मे हो या फिर...

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‘सन्मति वाणी’ के संपादक पंडित जयसेन जैन का निधन: समाजजनों ने शोक संवेदनाएं व्यक्त की

सन्मति वाणी के संपादक पंडित जयसेन जैन का आकस्मिक निधन हो गया। इससे दिगंबर जैन समाज में शोक की लहर है। जूनी इंदौर के श्मशान में उनकी देह अग्नि को समर्पित की गई।...

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टोंक के प्रकाश पटवारी जैन को हीरक, मुकेश कुमार जैन स्वर्ण एवं हेमलता जैन पाटनी रजत पदक सें सम्मानितः 26वां महामंत्र लेखकों का सम्मान समारोह संपन्न

राणा, प्रताप, मीरा और पन्नाधाय के तप त्याग और साधना की पावन वसुंधरा राजस्थान प्रांत की गुलाबी नगरी श्री दिगंबर जैन मंदिर चंद्रप्रभु दुर्गापुर जयपुर में श्री...

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Life Management 31 जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : शतपदगामी वामपार्श्वशायी – भगवान महावीर की दृष्टि में

हमारी यानि विशेषकर शहरी लोगों की डाईट खराब होती जा रही है। क्योंकि डाईट में मैदा, प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड और मसालेदार चीजों को खाने का चलन बहुत अधिक बढ़ता चला...

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Life Management 30 जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : शाकभुक् – शाकाहारी भोजन – भगवान महावीर की दृष्टि में

शाकाहारी भोजन करने का अर्थ यह हैं कि शुद्ध और सात्विक भोजन किया जाना चाहिये। इसे हम यू भी समझ सकते हैं कि किसी भी जीव जिसमें जीवन का अंश हो उसे रंच मात्र भी...

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सतगुरु पैराडाइस में जिन मंदिर निर्माण का शिलान्यासः मुनिराज ससंघ के सानिध्य में

श्री विशुद्ध सागरजी के शिष्य श्री आदित्य सागरजी, अप्रमित सागरजी, आराध्य सागरजी, सहज सागरजी एवं क्षुल्लक श्रेयस सागरजी ससंघ के सानिध्य में सर्वाेदय पार्श्वनाथ...

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Life Management 29 जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : मितभुक् – परिमित भोजन- भगवान महावीर की दृष्टि में

परिमित भोजन का अर्थ यह हैं कि उचित मात्रा में भोजन को ग्रहण करना है। वह भोजन जो गरिष्ठ न हो और हमें बीमारियों से बचाने वाला हो। जो स्मरण शक्ति को भी कमजोर न...

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Life Management-28 जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : हितभुक्-हितकारी भोजन – भगवान महावीर की दृष्टि में

हितकारी आहार से आशय यह हैं कि कुछ भोजन ऐसे होते हैं जिनकी तासीर अथवा गुण आपस में मिलते है। इसका अर्थ यह हैं कि ये एक-दूसरे के अनुकूल होते है, जिन्हे हम हितकारी...

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गायत्री नगर मन्दिरजी में केसर तिलक होलीः पुलक मंच परिवार ने केसर प्रदान की

भारत गौरव आचार्यश्री पुलक सागरजी के आर्शीवाद से प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी अष्टान्हिका महापर्व व होली के पावन पर्व पर पुलक मंच परिवार की ओर से आदिनाथ...

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पूजा में प्रमाद का कोई स्थान नहीं-आचार्य श्री वर्धमान सागरजीः गुणानुवाद कर पूजा में 1024 अर्घ्य समर्पण किए

पूज्यता ऐसे ही नहीं आती है। यह गुणों से प्राप्त होती है। पूजा में प्रमाद का कोई स्थान नहीं है। प्रमाद से पूजा के फल की प्राप्ति भी नहीं होती है। उक्त विचार...

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