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ज्ञानतीर्थ पर धर्मसभा में बताया संगति का महत्व : दुष्ट व्यक्तियों से सदैव दूरी बनाकर रखना चाहिए -आचार्य ज्ञेयसागर

पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट… मुरैना। संसार में संगति का बहुत महत्व है। हमें संगति का सदैव ध्यान रखना चाहिए। जो मन, कार्य और बुद्धि से परम हंस हैं, उन्हें...

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जैन मिलन स्वतंत्र की ओर से आयोजन : गरीब बच्चों को वितरित की गई जरूरत की सामग्री

जैन मिलन स्वतंत्र डबरा द्वारा शासकीय माध्यमिक विद्यालय पठर्रा डबरा से लगभग 9 किलोमीटर दूरी पर निर्धन गरीब छात्र एवं छात्राओं को जरूरतमंद स्टेशनरी पाठ्य सामग्री...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : समझाया भक्तामर के 18वें काव्य का महत्व

मुनि श्री विहसंतसागर महाराज ने कहा कि हमें कभी भी किसी की पड़ी हुई, रखी हुई वस्तु को नहीं उठाना चाहिए क्योंकि जैन आगम में आचार्य भगवंत ने कहा है कि आचौर्य...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन : हमारा भारत कर्म प्रधान देश है – अचार्य प्रमुख सागर महाराज

 कर्म गहन विधान पूजन हमारे जीवन को महान बनाता है। हमारे जीवन में 148 कर्म की प्रकृतियां हैं, वही हमारे शरीर का निर्माण करती हैं, वही हमें सुख- दुख और चारों...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन उपासना: समर्पण एवं भावना से आराधना की उत्पत्ति होती है – आर्यिका विभाश्री 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने कहा कि जो अपने परिवार के साथ भगवान की पूजा करते हैं, वे तीर्थंकर के कुलों में उत्पन्न होते हैं...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : शोधन करके ध्यानपूर्वक भोजन करो- आर्यिका विज्ञानमति माताजी

आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने प्रवचन के दौरान कहा कि जब तक जीव के अनंतानुबंधी क्रोध, मान, माया, लोभ समाप्त नहीं होती तब तक सम्यगदर्शन रूपी सूर्य का उदय नहीं...

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प्रवचन के माध्यम से बताया आहारदान का महत्व : बरसात, हवा, कर्म और साधु कब आ जाए, पता नहीं – मुनिश्री सुधासागर

जब आप मकान बनवाते हैं तो उसमें विभिन्न विषयक अलग-अलग कमरे बनवाते हैं लेकिन आप साधुओं के लिए आहारशाला या स्वाध्याय के लिए अलग से कमरा नहीं बनवाते। दिगम्बर साधु...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : अहंकार और आलस्य पतन का भाव उत्पन्न करते है – आर्यिका विभाश्री

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि आत्मा के शांत समुंद्र में जो राग-द्वेष रूपी लहरें उठती हैं, यही हमारे...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : समग्र जैन समाज तुम्हारा सधर्मी परिवार – आचार्य विहर्ष सागर

दुनिया में जैन समाज 1% है लेकिन सब पर भारी है क्योंकि जैनों के साथ देव शास्त्र गुरु का आशीर्वाद है। यह उद्गार गुरुवार को आचार्य श्री विहर्षसागर जी महाराज ने...

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चातुर्मासिक धर्म सभा में प्रवचन : उपाध्याय श्री विहसंत सागर ने बताया भक्तामर के दसवें काव्य का महत्व

प्रातः कालीन क्रीम क्लास में मुनिवर विहसंत सागर महाराज ने यह बताया कि तीर्थंकरों के 34 अतिशयों में केवलज्ञान के दस अतिशय होते हैं, जो घातिकर्म के क्षय होने पर...

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