Tag - Dharmasabha

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : इच्छा और तृष्णा से बचने की एक मात्र औषधि है संतोष – आर्यिका विभाश्री

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि छोटे को देखकर जिओ क्योंकि छोटे को देखकर जीवन में सुख और शांति बनी रहेगी...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : जैन रामायण की हो रही है वाचना

निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम् प्रिय शिष्य परम पूज्य मुनि श्री 108 योग्य सागर जी महाराज, मुनि श्री 108...

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जैन समाज ने निकाली भव्य शोभायात्रा : अयोध्या तीर्थ प्रभावना रथयात्रा का कामां में हुआ नगर भ्रमण

शाश्वत तीर्थ क्षेत्र अयोध्या के प्रचार प्रसार एवं सर्वांगीण विकास के लिए अयोध्या तीर्थ प्रभावना रथ का कामां जैन समाज ने भव्य अगवानी करते हुए नगर भ्रमण के साथ...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : बाल संस्कार पाठशाला का हुआ आयोजन

धर्मसभा में आचार्य श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि हमें भगवान की पूजन अष्ठ द्रव्य से करनी चाहिए और हमें मंदिर में तीन बार परिक्रमा देते समय देव स्तुति बोलनी...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : भक्तामर के 12वें काव्य का बताया महत्व

धर्मसभा में आचार्य श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि जो जितना परिग्रह रखता है, उसे उतने ही विकल्प ज्यादा आते हैं। जगत के संकल्प ही विकल्पों का जनक है। यदि...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : भक्तामर के 11वें काव्य का बताया महत्व

धर्मसभा में आचार्य श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि देह को कृष करने वाले धर्म बहुत जन करते हैं, लेकिन तत्व का निर्णय करके तप करना वास्तविक तपस्या है। जिसने तन...

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भक्तामर शिविर में आचार्य श्री ने कहा कि भक्ति का स्त्रोत भक्तामर : प्रभु भक्ति में ही आनंद की अनुभूति- विनम्र सागर

श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर में उच्चारणाचार्य विनम्रसागर महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि सबसे सरल कार्य है प्रभु की भक्ति करना। इसमें...

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धर्मसभा को संबोधित कर व्यक्त किए उदगार : पुण्य को ठुकराकर जो आता है उसकी कथा पुराण बन जाती है – मुनि श्री सुधासागर महाराज

निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि आज अमीरी बहुत बड़ी सजा है कि तुम चाहकर भी भगवान का नाम नहीं ले पा रहे।...

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धर्मसभा को संबोधित कर व्यक्त किए उदगार : जैनी सदा पापियों के लिए अपशुकन है – मुनि श्री सुधासागर महाराज

निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि कर्म की अदालत में कोई लेन-देन नहीं करना। हर्ष पूर्वक सजा को ग्रहण करना...

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चातुर्मासिक प्रवचन में धर्मसभा को किया संबोधित :  महान बनना तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना – मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। पढ़िए शुभम जैन की...

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