Tag - Dharmasabha

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भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 10 के बढ़ते कदम : बरायठा एवं दलपतपुर में नवीन शाखाओं का गठन

भारतीय जैन मिलन के भ्रमण कार्यक्रम के दौरान बरायठा एवं दलपतपुर में नवीन शाखाओं का गठन राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पदाधिकारियों की उपस्थिति में किया गया। पढ़िए मनीष...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन : गुरु ने की भक्तामर 30वें काव्य की व्याख्या

धर्मसभा में विहसंतसागर जी महाराज ने कहा कि वाणी हमेशा मधुर होनी चाहिए। वाणी में कभी भी कर्कश नहीं होना चाहिए। जैसे बांस की बांसुरी बनाई जाती है तो उसकी आवाज...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन साधु, राजा और पूजा को निकला श्रावक होता है मांगलिक: मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज

निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पुरुष तीन अवस्थाओं में मांगलिक होता है, एक साधु, दूसरा राजा और तीसरा जब कोई...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : इस असार संसार में कोई किसी का नहीं हैं -आचार्य विनिश्चय सागर

हमें जीवन कैसे जीना है, ये आना चाहिए। हमको इसे जीना आना चाहिए। लोग दुखी क्यों होते हैं, क्यों अवसान में चले जाते हैं ? क्यों दूसरों को कोसते हैं ? इस सबका कारण...

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उग्र तपस्वी पुष्पा बहना करते अभिनन्दन आज तुम्हारा : दीर्घ मासक्षमण तपस्वी पुष्पा पगारिया की निकली जयकार यात्रा

पूज्य श्री धर्मदास स्थानकवासी जैन सम्प्रदाय के प्रवर्तक पूज्य श्री जिनेन्द्रमुनिजी महाराज की आज्ञानुवर्ती पूज्या श्री निखिलशीलाजी माताजी आदि ठाणा – 4 के...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : देव, शास्त्र और गुरु के सामने कभी गरीब मत बनना-मुनि सुधासागर महाराज

जैन सम्प्रदाय में कहा है भगवान, गुरु के सामने कभी लेने नहीं जाना। उनको देना है। खेत में बोएंगे, तभी फसल आएगी। बड़ों का धन भोगा नहीं जाता, उनको दिया जाता है।...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : जो लोग कान के कच्चे होते हैं वह लोग आगम के अच्छे शुत्र को छोड़ देते हैं- आचार्य श्री प्रमुख सागर

चार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने कहा कि संसार में सबके पास कान हैं। कान से सुनते सब हैं परन्तु कान की बात पर ध्यान नहीं देते हैं। जो लोग कान के कच्चे होते हैं...

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30 अगस्त को नोएडा में वस्त्र त्यागकर बनेंगे जैन संत : दीक्षार्थी आनंद भैया की हुई गोद भराई

श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आनंद भैया की गोद भराई की गई। वह दिगम्बराचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज के कर कमलों से 21 अगस्त को श्री...

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ज्ञानतीर्थ पर बताया कि अहंकार क्यों होता है : अपने को सर्वश्रेष्ठ मानने पर होता है अहंकार- आचार्य ज्ञेयसागर

अपने गुणों को ही संसार में सर्वश्रेष्ठ समझकर औरों को दीन, हीन, नीच, कमजोर समझना और देखना अहंकार की श्रेणी में आता है। उक्त विचार सप्तम पट्टाचार्य श्री...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : भक्तामर के 26वें काव्य पर दिया व्याख्यान

धर्मसभा में उपाध्याय श्री विहसंतसागर महाराज ने कहा कि जो भी जीव जन्म लेता है, उसके साथ कर्म साथ में जरूर आते हैं। ज्ञानवरण आदि आठ कर्म जीव को दुःख देते हैं और...

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