Tag - Acharya Shri Vardhman Sagar JI

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अर्थ और काम पुरुषार्थ धर्म नीति अंधकार करे: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कर्मों के प्रतिफल के संबंध में विस्तार से बताया 

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आदर्श नगर श्री पारसनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान संघ सानिध्य में हो रहे हैं। प्रातःकाल श्री...

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सूरी मंत्रोच्चार से प्रतिमाएं पंच कल्याणक में प्रतिष्ठित कर पूजनीय होती है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्रीजी के दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, दान के बारे में बताया 

आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में...

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क्षुल्लक श्री शील सागर जी अतिशय क्षेत्र टोंक में पंचतत्व में लीन : समाधिस्थ क्षुल्लक श्री की डोला विमान यात्रा निकाली, समाजजनों ने दी भावांजलि 

समाधिस्थ मुनि श्री निर्मल सागर जी की जन्म एवं समाधि भूमि अतिशय क्षेत्र टोंक में क्षुल्लक श्री शीलसागर जी का मंगलवार रात्रि 12.43 बजे आचार्य श्री के श्री मुख से...

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महापुरुषों की न्याय और नीति संस्कृति से परमात्मा बनने का पुरुषार्थ करें: टोंक में 9 दिवसीय अखंड णमोकार मंत्र का पाठ प्रारंभ 

 अतिशय क्षेत्र टोंक में प्रतिदिन अनेक प्रसिद्ध समाजसेवी श्री जी और आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पधार रहे हैं। आचार्य श्री वर्धमान...

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आत्महत्या का सोचना और करना पाप है इससे अल्पायु कर्म का बंध होता है: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म आराधना का महत्व समझाया 

दशलक्षण पर्व में 10 दिनों तक धर्म की आराधना धर्म की पाठशाला अध्यात्म महापर्व में आपने क्या सीखा है? उत्तम क्षमा, मार्दव आर्जव, शौचधर्म से क्रोध, मान, माया और...

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त्याग धर्म में राजा श्रेयांस ने सबसे पहले दानतीर्थ का प्रवर्तन किया : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने त्याग और दान को श्रेष्ठतम निरुपित किया 

दसलक्षण धर्म में पहले दिन से चार कषायों का त्याग करने की शिक्षाऔर उपदेश दिए गए। शास्त्रों और पूजन में उल्लेख है कि दान चार प्रकार का है और चार संघ को दीजिए। यह...

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संसार परिभ्रमण समाप्त करने के लिए बहिरंग और अंतरंग तप आवश्यक: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने करवाई इंद्र ध्वज महामंडल विधान की पूजा

आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि दशलक्षण पर्व में अनेक पर्व समाहित हैं। प्रतिदिन आप दशलक्षण धर्म और इंद्र ध्वज महामंडल विधान की पूजन कर रहे हैं। सात राजू...

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मन वचन और काय की पवित्रता से शुचिता आती है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया सत्य धर्म का रहस्य 

विधानाचार्य कीर्तिय के निर्देशन में पंचामृत अभिषेक के बाद इंद्र ध्वज मंडल विधान की पूजन प्रतिदिन चल रही है। आचार्य श्री द्वारा पूजन के मध्य पूजन के द्रव्यों को...

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मन, वचन,काय कुटिलता का परित्याग सरलता धारण ही उत्तम आर्जव धर्म: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 76 वां अवतरण वर्ष भक्ति पूर्वक मनाया

दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने अपनी देशना में कह कि भगवान की इंद्रध्वज मंडल विधान की पूजन सामान्य बात नहीं है। बहुत...

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श्री पार्श्वनाथ भगवान का पंच कल्याणक 7 से 12 नवंबर तक टोंक में: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में होगा भव्यतम आयोजन 

पंचकल्याणक से प्रतिमाओं में अतिशय बढ़कर पूजनीय हो जाती है। पुरानी टोंक में श्री पार्श्वनाथ भगवान का पंच कल्याणक संघ सानिध्य में आगामी 7 से 12 नवंबर तक होगा।...

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