Tag - Acharya Shri Vardhaman Sagar Ji Maharaj

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चक्रवर्ती भरतजी की महायश गाथा दिग्विजय यात्रा में शामिल हों: भरतस्य भारतम महानाटक का मंचन आज अवश्य देखें

पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ और आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में चल रहे पंचकल्याणक महामहोत्सव में...

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आर्यिका आगम मति माताजी के सानिध्य में बाहुबली भगवान को निर्वाण लाडू अर्पण : मोक्ष कल्याणक पर भक्ति में लीन रहे सनावद नगर के समाजजन

नगर के गौरव वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के आशीर्वाद से 23 वर्ष पूर्व स्थापित हुए दिगंबर जैन श्री क्षेत्र सिद्धाचल पोदनपुरम...

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प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के दिगंबर जैन समाज पर अनेक उपकार : मुनिद्वय की जन्म नगरी में आचार्य श्री शांति सागर स्तूप विराजित किए 

कई नगरों में आचार्य शांति सागर जी की पाषाण और धातु की प्रतिमाएं विराजित हुई हैं। उनके शांति स्तूप भी विराजित किए गए हैं। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज...

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मुनिश्री विशाल सागर जी को विनयांजलि अर्पित की : प्रदेश भर से आए लोगों ने अपने भाव किए प्रकट 

श्री आदिनाथ दिगंबर जैन नसियाजी में चल रहे चातुर्मास महोत्सव के दौरान रविवार को मुनि श्री विशाल सागर जी महाराज की उत्कृष्ट एवं क्षमता पूर्वक समाधि मरण के उपरांत...

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जयपुर के सुरेश शाह 20 अप्रैल को मंदसौर में दीक्षा लेंगे: परिजनों ने विभिन्न नगरों में किया अभिनंदन 

जयपुर के सुरेश शाह 20 अप्रैल को आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के कर कमलों से मंदसौर में दीक्षा लेंगे। परिजनों द्वारा अभिनंदन कर श्रीफल, सूखे मेवे फल आदि...

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आचार्य श्री शांति सागर जी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा : भक्ति से शक्ति मिलती है संकल्प शक्ति में बल है

पाषाण, धातु, रत्न की प्रतिमाओं में गुणों का आरोपण कर पूज्यनीय बनाया जाता हैं। यह देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दी। उनके सानिध्य में आचार्य श्री शांति...

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भगवान महावीर से जुड़ेंगे तभी लाइफ स्मार्ट बनेगी- मुनि अपूर्व सागर: जैन धर्म के संस्थापक नहीं, जिन धर्म के प्रवर्तक है महावीर भगवान

वात्सल्य वारीधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री अपूर्व सागर जी ने भगवान महावीर स्वामी जन्मकल्याणक के अवसर पर कहा कि इस संसार में हिंसा...

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दूसरे के दुख को अपना समझकर दूर करना ही दया – मुनि अपूर्व सागर दया से बड़ा कोई धर्म नहीं

वात्सल्य वारीधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री अपूर्व सागर जी महाराज ने कहा कि धर्म का मूल दया है। वीतराग धर्म के अलावा संसार में अन्य...

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धर्म के बिना कोई भी आत्मा सुखी नहीं - मुनि अपूर्व सागर पंच परमेष्ठी के मन में रहता है धर्म 

अन्याय और अधर्म इस लोक के साथ ही परलोक में भी दुख देने वाले हैं।धर्म के बिना इंसान चलती फिरती लाश के समान है । धर्म को ज्ञानी लोगों ने संचय किया है। धर्म को...

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धर्म हमारा रक्षक है बाकी सब भक्षक – मुनि अपूर्व सागर: मुनिश्री ने धर्म के बताए 16 सुख

मुनि श्री अपूर्व सागर ने चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिन धर्म, वीतराग धर्म, सुख की खान है। यह सभी का हित करने वाला होता...

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