छत्रपति नगर आदिनाथ जिनालय में विराजमान उपाध्याय मुनि विश्रुत सागर जी ने ऋषभ सभागृह में धर्म सभा को संबोधित किया। यहां उनके प्रवचन को सुनने के लिए बड़ी संख्या...
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मानव जीवन दुर्लभ चिंता मणि रत्न के समान है। बड़े भाग्य से नर तन पाया मनुष्य कुल पर्याय मिली। श्री जिनवर के दर्शन करने जिनवाणी की राह मिली। मानव जीवन का प्रत्येक...
यह तुमने अच्छा किया। यह तुमने गलत किया। तुम्हें अपनी गलती को स्वीकार करना चाहिए। यह बात बताने वाला ही सच्चा मित्र होता है, क्योंकि वह तुम्हें जीवन की सच्चाई से...








