Tag - विदिशा

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जीवन में यदि सम्मान पाना है, तो सच को स्वीकारें: धर्मावलंबी सुन रहे मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी की मंगलवाणी 

आचार्य श्री विशुद्धसागर जी सहित 32 पिच्छी यहां विराजित होकर यहां जैन समाज को धर्म और ज्ञान से परिपूरित कर रहे हैं। संतों के नियमित प्रवचन को यहां की धर्मप्रेमी...

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मंदिर मूर्ति विज्ञान पर पहली वैश्विक कार्यशाला: प्रतिष्ठा मुहूर्त के संदर्भ में महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित

सैदपुर गांव में 3 से 5 जून तक त्रिदिवसीय राष्ट्रीय मूर्ति कला संगोष्ठी हुई। आयोजन आचार्य श्री समयसागर जी के आशीर्वाद, मुनि श्री अभयसागर जी महाराज की प्रेरणा और...

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हर धोखा एक पाठ है और हर पाठ नई शक्ति देता है : मुनि श्री ने धोखेबाजों से सावधान रहने की सलाह दी

पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ विदिशा में विराजमान हैं। यहां पर मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज के प्रवचन भी हो रहे हैं। उनके प्रवचन सुनने के लिए बड़ी...

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दिगंबर जैन समाज इंदौर की बेटी परिणीता का विदिशा में निधन: विवाह समारोह के संगीत कार्यक्रम में नृत्य के दौरान मौत, छाया मातम

जीवन का भरोसा नहीं है। आजकल ऐसे हादसे हो रहे हैं कि हंसते-खेलते, चलते-फिरते इंसान का दम टूट रहा है। ऐसा ही पहाड़ सा दुःख इंदौर की महिला मंडल की सबसे एक्टिव...

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मानव सेवा का उत्कर्ष कार्य : दिव्यांग जनों को कृत्रिम पैर निशुल्क लगाए

श्री सुरेशचंद स्वयंलता धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट विदिशा द्वारा आयोजित कृत्रिम पैर प्रत्यारोपण शिविर में 74 दिव्यांग जनों को 1 व 2 जून को कृत्रिम पैर...

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सम्यक दृष्टि जीव 44 दोषों से रहित होता है: परम पूज्य आर्यिका 105 श्री विश्रेय माताजी ने दिए प्रवचन

सम्यक दृष्टि जीव 44 दोषों से रहित होता है। ये 44 दोष इस प्रकार हैं आठ शंकादिदोष, आठ मद, छः अनायतन, तीन मूढ़ता ये दोष इस प्रकार हुए। पढ़िए एक रिपोर्ट… परम...

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आचार्य श्री विशुद्ध सागर का विदिशा आगमन 3 मई को: इंदौर में मंगलमयी चातुर्मास का करेंगे निवेदन

  आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का विदिशा आगमन 3 मई को होने जा रहा है। इसकी भव्य मंगल अगवानी की तैयारियां श्री सकल दिगंबर जैन समाज समिति की ओर से...

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श्रमण एवं श्रावक के योग का नाम है पावसयोग: सुप्रभसागर जी महाराज

त्रिदिवसीय कार्यक्रम के साथ चातुर्मास मंगलकलश स्थापना समारोह सम्पन्न न्यूज सौजन्य- सुनील जैन संचय,ललितपुर विदिशा (मप्र) । परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी...

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