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सम्यक दृष्टि जीव 44 दोषों से रहित होता है: परम पूज्य आर्यिका 105 श्री विश्रेय माताजी ने दिए प्रवचन


सम्यक दृष्टि जीव 44 दोषों से रहित होता है। ये 44 दोष इस प्रकार हैं आठ शंकादिदोष, आठ मद, छः अनायतन, तीन मूढ़ता ये दोष इस प्रकार हुए। पढ़िए एक रिपोर्ट…


परम पूज्य आर्यिका 105 श्री विश्रेय माताजी ने श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर में सुबह पूजन अभिषेक शांतिधारा के पश्चात आज प्रवचन में कहा कि सम्यक दृष्टि जीव 44 दोषों से रहित होता है। ये 44 दोष इस प्रकार हैं आठ शंकादिदोष, आठ मद, छः अनायतन, तीन मूढ़ता ये दोष इस प्रकार हुए। अब इसके बाद सात व्यसनी का भी त्यागी होता है।

पहला व्यसन जुआ खेलना
अगर हमारा जुआ खेलने का त्याग नहीं है, और हम खेलते भी नहीं हैं, फिर भी हमें जुआ खेलने का दोष लगता है। जितने भी जीत और हार के कार्य है, सभी जुआ में आते हैं।

दूसरा व्यसन मांस खाना
आप सभी का मांस खाने का त्याग है, फिर भी हमें मांस खाने का दोष लगता है, जो व्यक्ति रात्रि का भोजन करता है, रात्रि में कोई भी वस्तु खाने से मांस खाने का दोष लगता है। अमर्यादित वस्तु खाने से भी मांस खाने का दोष लगता है, इसलिए मर्यादित वस्तु ही खाने में प्रयोग करें।

तीसरा व्यसन शराब पीना
शराब का भी आपका त्याग है, पर आप कोल्ड ड्रिंक आदि पीते, इन पदार्थों के उपयोग से हम कहीं कहीं दोषी हैं, इसलिए जीवन में मर्यादित वस्तु ही उपयोग में लें और व्यसन से बचें। इस दौरान सकल जैन समाज की महिला एवं धर्म प्रेमी बंधु उपस्थित थे।

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