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श्रुत पंचमी पर जिनवाणी की निकली शोभायात्रा : ज्ञान, संयम और आत्मकल्याण का दिया संदेश


श्रुत पंचमी महापर्व पर धरमपुरी में दिगंबर जैन समाज द्वारा जिनवाणी पूजन, अभिषेक, शांतिधारा एवं शोभायात्रा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने ज्ञान परंपरा के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए जिनवाणी की आराधना की। पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन बज की यह रिपोर्ट।


धरमपुरी। श्रुत पंचमी महापर्व पर शुक्रवार को नगर में धर्ममय वातावरण रहा। दिगंबर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन एवं जिनवाणी की विशेष आराधना कर ज्ञान परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।

भक्तिमय माहौल में हुई आराधना

प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया। भक्तिमय वातावरण में मां जिनवाणी की महिमा का गुणगान किया गया तथा श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चना कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

जिनवाणी को मस्तक पर रख निकाली शोभायात्रा

श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने जिनवाणी को अपने मस्तक पर विराजित कर मंदिर परिसर से शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा में समाजजनों ने भक्ति एवं उत्साह के साथ सहभागिता निभाई।

समाजजनों की रही सहभागिता

कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष हीराचंद सेठी, माणकचंद बज, संतोष पाटनी, हीराचंद बज, विवेक कासलीवाल, सुनील सेठी, प्रीतेश जैन, अंकुश पाटनी, शशिप्रभा सेठी, चंदनबाला बज, शकुन्तला बज, चंदा कासलीवाल, संगीता पाटनी सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

श्रुत पंचमी का बताया महत्व

दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष राजेश जैन बज ने बताया कि श्रुत पंचमी जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन जिनवाणी की पूजा कर श्रद्धालु ज्ञान, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

जिनवाणी देती है जीवन को सही दिशा

उन्होंने कहा कि जिनवाणी मानव जीवन को सत्य, अहिंसा और आत्मानुशासन का संदेश देती है। यह केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण का भी महापर्व है।

ज्ञान परंपरा के प्रति जताई आस्था

श्रुत पंचमी महोत्सव के माध्यम से समाजजनों ने जिनवाणी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की तथा जीवन में स्वाध्याय, संयम और सदाचार को अपनाने का संकल्प लिया।

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